यूपीएल , वेदर रिस्क और एचडीएफसी कंपनियों नें किसानों के हित में संभाला मोर्चा

12

12राहुल शर्मा, नई दिल्ली, N.I.T. : पिछले तीन सालों में नकदी फसल कपास की उपज में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है । भारतीय कपास निगम लिमिटेड के मुताबिक , 2013-14 में 398 लाख गांठे उत्पादन हुई थी जिसके बाद से धीरे धीरे ग्राफ नीचे जा रहा है । 2015-16 सत्र के दौरान कपास उत्पादन 352 लाख गांठे होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2014—15 में कपास की उपज 380 लाख गांठे हुई थी इस बीच कपास में करीब 28 लाख गांठो की गिरावट हुई है । पिछले साल पंजाब के मलवा और हरियाणा कॉटन बेल्ट में कहे जाने वाले कुछ हिस्सों में किसानों को सफेद मक्खी से सबसे अधिक नुकसान हुआ था जिसके कारण करीब 15 किसानों ने आत्महत्या कर ली है ।
हरियाणा राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार , वर्ष 2014-15 में 14 लाख 95 हजार एकड़ में कपास की फसल बोई गई थी। इनमें सबसे अधिक सिरसा जिले में 1,89500 हेक्टेयर और दूसरे नंबर हिसार जिले में 1,55200 हेक्टेयर में कपास की फसल बोई गई थी। सरकार ने रकबे की 50 प्रतिशत फसल सफेद मक्खी से खराब हुई मानी थी। वहीं , वेदर रिस्क मैनज्मन्ट सर्विसिज़ प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक , “2015 में सफेद मक्खी के कारण नुकसान करीब 4200 करोड़ हुआ ”
साथ ही सफेद मक्खी की वजह से किसानों को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा । ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए कुछ प्राइवेट ऑर्गनिज़ैशन सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है जिसमें से एक वेदर रिस्क और यूनाइटेड फॉस्फोरस लिमिटेड है । जहां किसानों को खेती में होने वाली समस्याओं से बचाने की कोशिश की जाती है ।
2016 में वेदर रिस्क ने किसानों के लिए सॉइल डॉक्टर सर्विस पेश की । जिसमें भूमि की उर्वर क्षमता का आकलन लगाया जाता है जिससे फसल की उपज को बढ़ाया जा सकता है ।
दुसरी तरफ ,प्लांट डॉक्टर सर्विस भी पेश की । इस सर्विस के अनुसार, फसल की बुआई से लेकर कटाई तक का ख़्याल रखा जाता है साथ ही मौके पर डिज़ीज के बारे सूचना दी जा सकती है । इसके लिए किसान को वेदर रिस्क के विशेषज्ञों सिर्फ व्हाट्सऐप पर फसल की तस्वीर भेजनी होती है । इन दोनों सर्विसों से किसानों की भूमि की उर्वर क्षमता बढ़ाई जाएगी साथ ही बीमारियों से बचाकर फसल का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है ।
यह सारी प्रकिया किसानों से बातचीत के बाद की जाती है। जिससे उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए किसानों को भरपूर सहायता की जा सके । जिसके बिंदु इस प्रकार है ।
1.किसानों की सोशल लाइफ के बारे जानना
2.किसान की भूमि के अगले पिछले के बारे में जानकारी लेना
3. कैसे किसान बर्बाद फसल से निपटता है ।
4.कितना किसान सरकार की योजनाओं के बारे में जागरुक है ।
5 क्या किसान की फसल बीमित है ?
किसानों से फसलें और उनकी किसानी करने के तरीके से रुबरु होने के बाद क्राप सिक्योर पैकेज के बारे में शिक्षित किया जाता है बता दें कि ये पैकज 3 से 4 महीने तक चलता है जिसमें कॉटन की फसल बोने से लेकर काटने तक की प्रकिया में गाइड किया जाता है । रोगों से बचाने के लिए सीड ट्रीट्मन्ट, सॉइल टेस्टिंग, डिज़ीज़ मैनज्मन्ट, आप्टमल इरगैशन मेथड्ज़ ,पेस्ट कन्ट्रोल और स्प्रैइंग का प्रयोग किया जाता है । जैसे ही किसान पैकज को चुन लेता है वैसे ही वेदर रिस्क के कर्मी किसान की भूमि का निरक्षण करते है उसी के अनुसार सप्ताह में फसल और मिट्टी में स्प्रै और पेस्टासाइड छिड़का जाता है जहां किसान कपास की फसलों को लीफ कर्ल वायरस और काला सूटी मोल्ड जैसे रोगों से बचा सकता है। अहम बात यह है कि विशेष रोगों से बचाने के लिए वेदर रिस्क और एचडीएफसी बैंक ने फार्म लेवल बीमा किसानों के लिए मुहैया करा रही है ।
साल दर साल , सरकारों ने कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए 5 साल कार्यक्रम में कुछ स्पेशल योजनाएं चलाई है इसके बावजूद कैसे भी कोई कपास उत्पादन में विकास नहीं देखा गया है । प्राइवेट कंपनियों की पहल शायद इस सुरत को बदलने में कामयाब हो जाए ।

0 Comments

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

Designed by Krypton Technology

Log in with your credentials

Forgot your details?