राजस्थान: सालो से रेगिस्तान मे पानी के स्त्रोत बनवा रहा है विदेशी जोड़ा

आज़ाद नेब, जयपुर, N.I.T : 79 साल के निकोलस ग्रे की उम्र भले ही ज्यादा हो, लेकिन उनका काम देखकर आपको कतई महसूस नहीं होगा कि वह रिटायरमेंट की आयु बहुत पीछे छोड़ आए हैं। उनकी 75 साल की पत्नी का जोश और इस जोड़े की सक्रियता देखकर भी आप यही सोचेंगे कि उन्हें अपना काम बदस्तूर जारी रखना चाहिए। निकोलस और मेरी ब्रिटेन के रहने वाले हैं, लेकिन राजस्थान जैसे उनका घर ही है। पिछले 30 सालों से निकोलस और मेरी नियमित तौर पर राजस्थान आते हैं। यह जोड़ा पिछले लंबे समय से राजस्थान के गरीबों और समाज के वंचित वर्ग को आसानी से पानी उपलब्ध कराने की कोशिशों में जुटा है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राजस्थान में पानी सोने से भी ज्यादा कीमती है।
निकोलस और मेरी ने रेगिस्तान के बीहड़ इलाकों में सर्दी और गर्मी के मौसम गुजारे हैं और मीलों तक पैदल रास्ता नापा है। इतनी मुश्किलें सहकर भी लोगों को पानी आसानी से उपलब्ध कराने के उनके समर्पण में कमी नहीं आई। निकोलस और मेरी के इस सफर की शुरुआत 1973 में हुई। रोम में निकोलस की मुलाकात रामसहाय पुरोहित नाम के एक गांधीवादी से हुई। पुरोहित रोम में एक शांति मार्च के लिए पहुंचे थे। पुरोहित की निकोलस और मेरी से दोस्ती हो गई। 1974 में निकोलस रामसहाय से मिलने डुडु जिले स्थित उनके गांव आए। फिर 1987 में जब राजस्थान में सूखा पड़ा, तब निकोलस और मेरी ने पुरोहित के साथ मिलकर लोगों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला किया।
निकोलस बताते हैं, ‘जब कुएं सूख गए और भारत में लाखों जानवरों और मवेशियों की मौत हो गई, तब जो हालात पैदा हुए उसमें तुरंत काम किए जाने की जरूरत थी। रामसहाय ने ग्राम सेवा मंडल नाम का एक गैर-सरकारी संगठन बनाया। फिर हमने मिलकर ‘वेल्स फॉर इंडिया’ नाम का संगठन बनाया। इसमें हमें गांवों में कुएं खोदते हैं।’ वह बताते हैं, ‘इन 30 सालों में हमने बहुत सीखा है। हमने पानी की अहमियत को समझा और ब्रिटेन जाकर अपने लोगों को भी यह समझाया। हमने बताया कि जहां करोड़ों लोग पानी की तलाश में अपनी आधी जिंदगी बिता देते हैं, वहां बाकी लोगों को पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए।’ वेल्स ऑफ इंडिया पानी की समस्या सुलझाने के लिए कुएं खोदने और उन्हें और गहरा करने पर ध्यान दे रहा था। फिर धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि जल संचयन इस समस्या का दूरगामी और बेहतर उपाय है।
अब ‘वेल्स ऑफ इंडिया’ गांव के लोगों के साथ मिलकर बारिश के महीनों में जल संचित करने पर फोकस करता है। इससे इतना पानी जमा किया जाता है कि लोग सालभर की जरूरतें पूरी कर सकें। गांव के तालाबों में जमा गाद को साफ करना, सामुदायिक तालाबों की खुदाई, जल भंडारण के लिए भूमिगत टैंक बनाना, छतों पर बारिश का पानी जमा करने की व्यवस्था करने जैसे काम भी यह संगठन बखूबी कर रहा है।

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