आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला नटराजन को चार साल की सजा

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शशिकला नटराजन

नई दिल्ली, N.I.T :  आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शशिकला नटराजन को दोषी मानते हुए निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई चार साल की सजा को बरकरार रखा है. यानी कि अब शशिकला का जेल जाना तय है और पन्नीरसेल्वम का मुख्यमंत्री बने रहना भी. इस मामले में शशिकला के भतीजे एन सुधाकरण और भाभी जे इलावरसी को भी अदालत ने दोषी माना है. इससे जुड़े चार आरोपितों में से एक जे जयललिता की पिछले साल दिसंबर में मृत्यु हो गई थी.

बेंगलुरू की एक विशेष अदालत द्वारा चार साल की सजा दिये जाने के बाद जयललिता और शशिकला समेत चारों आरोपितों को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा 2015 में बरी कर दिया गया था. उस समय तमिलनाडु के विपक्ष ने आरोप लगाया था कि उनका छूटना उच्च न्यायालय की गलती की वजह से संभव हुआ था. जयललिता के पक्ष के लोग इसे राजनीति से प्रेरित बता रहे थे. लेकिन अगर हाई कोर्ट के निर्णय को ही ठीक से देखें तो उस समय विपक्ष के आरोप ठोस जमीन पर खड़े दिखाई देते थे.

हाई कोर्ट के 919 पेज के फैसले में 852वें पेज पर इस मामले के चारों आरोपितों – जे जयललिता, एन शशिकला, शशिकला के भतीजे वीएन सुधाकरण और उनकी भाभी जे इलावरसी – द्वारा विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए कर्जों की सूची दी गई थी. इस सूची में दिए गए सभी कर्जों का योग करें तो वह बैठता है 10.7 करोड़ रुपये. अदालत के निर्णय में यह योग दिखाया गया था 24.2 करोड़ रुपये (सूची 1 देखें). यह सही योग से 13.5 करोड़ रुपये अधिक था. लोन की इसी गलत गणना के आधार पर बाकी सभी गणनाएं करके अदालत ने निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराये गए चारों आरोपितों को तब रिहा कर दिया था.

सूची 1 : दोषियों द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए लोन की सूची
सूची 1 : दोषियों द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए लोन की सूची

अगर इसे कुछ और तफसील से समझना चाहें तो कुल कर्ज की गलत गणना करने के बाद इसी पन्ने पर हाईकोर्ट ने आय में जुड़ने योग्य लोन निकालने के लिए इसमें में से छह करोड़ रुपये घटाए थे. अगर पिछली गणना सही होती तो यह आंकड़ा आता 4.7 करोड़ रुपये (10.7 – 6). लेकिन हाईकोर्ट की ‘गलती’ से यह बन गया 18.2 करोड़ रुपये (24.2 – 6).

अब इस लोन के गलत आंकड़े के आधार पर निर्णय के 913वें पन्ने पर जब अदालत ने आरोपितों की कुल आय निकाली तो वह बन गई 34.8 करोड़ रुपये (सूची 2 देखें). जबकि इसे सिर्फ 21.3 करोड़ रुपये होना चाहिए था. इस गलत आय के आधार पर जब अदालत ने आरोपितों की आय से अधिक संपत्ति (कुल संपत्ति – कुल आय) की गणना की (सूची 3 देखें) तो वह रह गई सिर्फ 2.8 करोड़ रुपये जबकि इसे होना 16.3 करोड़ रुपये चाहिए था.

2.8 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति कुल आय से सिर्फ आठ फीसदी ज्यादा बैठती है जबकि अगर गणना सही होती -16.3 करोड़ रुपये – तो यह कुल आय से करीब 76 फीसदी ज्यादा होती.

सूची 2 : बैंकों से लिये गये कर्ज की गलत गणना के आधार पर चारों दोषियों की कुल आय
सूची 2 : बैंकों से लिये गये कर्ज की गलत गणना के आधार पर चारों दोषियों की कुल आय

अदालत ने अपने निर्णय में यह कहते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया कि ‘कृष्णानंद अग्निहोत्री के मामले के मुताबिक यह एक स्थापित तथ्य है कि यदि कोई 10 फीसदी तक की आय से अधिक संपत्ति का मामला हो तो आरोपित को बरी होने का अधिकार है.’ लेकिन जैसा कि ऊपर से स्पष्ट है अदालत का यह निर्णय केवल गलत लग रही गणना के आधार पर ही सही हो सकता है. क्योंकि सही गणना के हिसाब से यह आय से आठ फीसदी नहीं बल्कि 76 फीसदी अधिक संपत्ति का मामला है.

सूची 3 : गलत कुल आय के आधार पर निकाली गई गलत आय से अधिक संपत्ति
सूची 3 : गलत कुल आय के आधार पर निकाली गई गलत आय से अधिक संपत्ति

हालांकि जयललिता के समर्थकों का मानना था कि पेज नंबर 852 पर दी गई कर्जों की सूची अधूरी है और अगर उसमें जयललिता और बाकी लोगों और उनकी कंपनियों द्वारा लिए सभी ऋण जोड़ दिए जाएं तो अदालत का हिसाब ठीक बैठ जाएगा. लेकिन कोर्ट के आदेश में इस सूची से पहले साफ-साफ लिखा था कि अदालत ने इस सूची में केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए कर्ज को ही शामिल किया था. इस सूची में कोई प्रविष्टि ऐसी भी नहीं था जो किसी छूटे हुए कर्ज की बात करती हो. ऐसे में गणना के गलत होने या इस सूची के ही गलत होने की संभावना ज्यादा दिखाई देती थी. पहली हालत में यह निर्णय ही गलत था और दूसरी दशा में निर्णय लिखा सही नहीं गया था.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत आदेश के बाद ही ठीक से पता चलेगा कि उसने किन-किन आधारों पर आरोपितों को दोषी पाया है. लेकिन जिस तरह का फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2015 में दिया था उसे एक न एक दिन शशिकला और जयललिता के लिए मुश्किलें पैदा करना ही था.

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