पाकिस्तानी संसद ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. वहां की सीनेट ने हिंदू विवाह विधेयक पारित कर दिया है. पाकिस्तान के कानून मंत्री जाहिद हमीद ने शुक्रवार को यह विधेयक सदन के सामने रखा था जहां इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. निचले सदन यानी नेशनल असेंबली ने इस पर सितंबर 2015 में ही मुहर लगा दी थी. अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा.

इस बिल के बाद पाकिस्तान के पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वां प्रांत में अल्पसंख्यक हिंदूओं को अपनी शादी का पंजीकरण कराने का अधिकार मिल जाएगा. पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक इस विधेयक में हिंदुओं की शादी, परिवार, मां और बच्चे को सुरक्षा प्रदान करने की बात की गई है. इसके अलावा इस बिल में तलाक और पुनर्विवाह के भी प्रावधान दिए गए हैं. इसमें शादी के लिए हिंदू लड़के और लड़की की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष तय की गई है. साथ ही इस कानून के उल्लघंन पर छह महीने की जेल और 5000 रु के जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है. इस बिल से हिंदुओं को भी उनकी शादियों के प्रमाण के लिए मुसलमानों के ‘निकाहनामा’ की तरह एक सरकारी दस्तावेज मिल सकेगा जिसे ‘शादीपरात’ कहा जाएगा.

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदुओं ने संसद के इस कदम पर अपनी खुशी जाहिर की है. पाकिस्तान में हिंदुओं को यह हक दिलाने के लिए पिछले तीन साल से काम कर रहे रमेश कुमार वंकवानी ने पाकिस्तान संसद के इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि इस बिल के पास होने के बाद जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं में कमी आएगी.

इस बिल से पहले पाकिस्तान की अल्पसंख्यक महिलाओं के पास शादीशुदा होने का कोई सरकारी सबूत नहीं होता था. इसके चलते असामाजिक तत्वों द्वारा जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराने की कई घटनाएं सुर्खियां बनती थीं. ऐसे में पाकिस्तान सरकार के इस कदम को खासतौर पर हिंदू महिलाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.