माओवादियों से संबंध रखने के कारण डीयू के रामलाल आनंद कॉलेज से निलंबित हो सकते हैं

07_03_2017-dusaibabaनई दिल्ली, N.I.T. :  माओवादियों से संबंध रखने के कारण डीयू के रामलाल आनंद कॉलेज से निलंबित चल रहे अंग्रेजी के प्राध्यापक जीएन साईबाबा को अब दोषी पाया गया है और ऐसी संभावना है कि अब उनको नौकरी से निष्काषित किया जा सकता है।

हालांकि, इस बाबत अंतिम फैसला कॉलेज की गवर्निंग बॉडी लेगी। डीयू के कई शिक्षकों का साईबाबा से संबंध था और कुछ शिक्षक तो गढ़चिरौली जेल में उनसे मिलने भी गए थे। प्राप्त सूचना के अनुसार, ये शिक्षक भी पुलिस के रडार पर हैं।

रामलाल आनंद कॉलेज के कार्यवाहक प्रिंसिपल आरके गुप्ता का कहना है कॉलेज प्रशासन ने पहले ही उनको निलंबित कर दिया था लेकिन अब हमें उनके बारे में पता चला है। केंद्र सरकार के नियम के तहत उनके ऊपर जो निर्णय लेना होगा कॉलेज की गवर्निंग बॉडी निर्णय लेगी। डीयू में या डीयू से बाहर होने वाले विभिन्न वामपंथी छात्र व शिक्षक संगठनों में साईबाबा की भागीदारी होती थी।

साईबाबा और उनके सहयोगियों को सजा सुनाए जाने पर जहां डीयू में राष्ट्रवादी विचारधारा वाले शिक्षकों में खुशी है वहीं वामपंथी खेमा मायूस है। ज्ञात हो कि साईबाबा के पक्ष में डीयू में उनका समर्थन करने वाले शिक्षकों ने कई बार मार्च निकाला था और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया था।

ज्ञात हो कि साईबाबा रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम के वामपथी संगठन से भी जुड़े रहे हैं। प्रोफेसर साईबाबा को मई 2014 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। ज्ञात हो कि साईबाबा चलने-फिरने में असमर्थ हैं। 90 फीसद विकलांग साईबाबा व्हीलचेयर के सहारे चलते है।

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