उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल जज के इस फैसले को अपने प्रशासन को कमजोर दिखाने वाला और अदालतों की ‘अप्रत्याशित पकड़’ का उदाहरण बताया है. उन्होंने यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उनका प्रशासन इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा. कुल मिलाकर इससे यह साफ हो चुका है कि राष्ट्रपति ट्रंप का दूसरा आदेश अब कानूनी लड़ाई जीतने के बाद ही जमीन पर उतर सकता है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने नए आदेश पर छह मार्च को हस्ताक्षर किए थे. पिछले आदेश के समय आई कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए मुस्लिम बहुल प्रतिबंधित देशों के अमेरिका में रहने वाले स्थायी प्रवासियों, मौजूदा वीजा धारकों और इराक को नए आदेश के दायरे से बाहर कर दिया गया था. इससे पहले जनवरी के आदेश के तहत ट्रंप प्रशासन ने सीरिया, ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के प्रवासियों के अमेरिका आने पर पाबंदी लगा दी थी. लेकिन, वाशिंगटन और अन्य राज्यों की याचिकाओं पर सिएटल की यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जेम्स रॉबर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी, जिसे अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा था.