पहली बार गर्मी की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट के आधे से ज्यादा जज जरूरी मामलों की सुनवाई करेंगे

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नई दिल्ली, N.I.T : सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. शीर्ष अदालत के आधे से ज्यादा जज (28 में से 15) आने वाली गर्मी की छुट्टियों में भी जरूरी मुकदमों की सुनवाई करते हुए नजर आएंगे. सामान्य तौर पर गर्मी की छुट्टी में सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की एक बेंच ही काम करती है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई के लिए इस दौरान पांच-पांच सदस्यों वाली तीन संवैधानिक बेंच काम करती रहेंगी. इन मामलों में मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक, हलाला निकाह और बहुविवाह प्रथा की संवैधानिकता प्रमुख है. इसके अलावा, वाट्सएप और फेसबुक पर निजता के अधिकार तथा अवैध रूप से भारत में आने वाले विस्थापितों के बच्चों को नागरिकता देने से संबंधित दो अन्य मामले भी हैं, जिन पर सुनवाई की जाएगी.

चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने गुरुवार को तीन तलाक से जुड़ी याचिकाओं को संवैधानिक बेंच को सौंपा था. इस पर 11 मई से सुनवाई होगी. पहले दो दिन (11-12 मई को) मुद्दे तय किए जाएंगे. इसके बाद अगले हफ्ते से जिरह शुरू होगी. जबकि 11 मई से ही सुप्रीम कोर्ट में गर्मी की छुट्टियां शुरू होती है. चीफ जस्टिस ने इस बार छुट्टियों के दौरान दो अन्य संवैधानिक बेंचों के काम करने की भी जानकारी दी थी.

इस पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व राजू रामचंद्रन ने असंतोष जताया. एक साथ तीनों संवैधानिक बेंच के सामने जिरह को मुश्किल बताते हुए रोहतगी ने कहा, ‘छुट्टियों में काम करना द्विपक्षीय फैसला होता है. इसमें वकीलों की सहूलियत का ध्यान रखने की परंपरा रही है. इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता.’ इस पर चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने कहा, ‘ये सभी मामले बहुत महत्वपूर्ण हैं. अगर अभी इनकी सुनवाई नहीं हुए तो वर्षों तक नहीं निपट पाएंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि वकील सभी मामलों में एक साथ बहस नहीं करेंगे, बल्कि यह काम बारी-बारी से किया जा सकता है.

वहीं, कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर तीन संवैधानिक बेंच एक साथ काम करती हैं तो वे वाट्सएप मामले में अदालत को सहयोग करने की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाएंगे. इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए साफ कर दिया कि वे तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई के फैसले पर कायम हैं.

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