शिक्षक विकास की अहम कड़ी – डॉ. एस.पी. सिंह

कलक्टर डॉ. सिंह ने प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक वाकपीठ संगोष्ठी को किया संबोधित

IMG-20170407-WA0013फ़िरोज़ खान, राजस्थान/बारां, N.I.T : जिला कलक्टर डॉ. एस.पी. सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज, प्रदेश व राष्ट्र के विकास की अहम कड़ी है उनके द्वारा भावी पीढी के माध्यम से सर्वांगीण विकास की दिशा तय होती है। इस प्रकार शिक्षक जिले में शैक्षिक गुणवत्ता के स्तर में वृद्धि, खुले में शौच से मुक्ति, स्वच्छता व सफाई के प्रति जागरूकता के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाकर महत्वपूर्ण परिवर्तन करने की क्षमता रखते हैं।

डॉ. सिंह गुरूवार को धर्मादा धर्मशाला के सभागार में आयोजित राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की वाकपीठ संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माता पिता के पश्चात् मनुष्य के जीवन में शिक्षक का अहम योगदान होता है एवं उनके द्वारा दी गई सीख सभी को स्वीकार्य होती है, अतः सभी संस्थाप्रधान यह संकल्प लें की विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण करवाएंगे, सफाई व स्वच्छता रखेंगे, विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में अभिवृद्धि करेंगे एवं विद्यार्थियों व आमजन को खुले में शौच की बुराईयों से अवगत कराते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर में शौचालय निर्माण के कार्य में सहभागी बनेंगे।

विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में अभिवृद्धि करें

कलक्टर डॉ. सिंह ने सभी संस्थाप्रधानों से कहा कि बारां जिला, राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में निर्धारित मापदण्डों के अनुसार अच्छा कार्य कर रहा है लेकिन जिले को शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर, विद्यालयों में शौचालय एवं स्वच्छता व सफाई के सभी मापदण्ड पूर्ण करते हुए प्रथम तीन पायदान में लाने हेतु सभी समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव का बहाना करने से बेहतर है कि उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग एवं समाजसेवियांे, भामाशाहो के सहयोग से वांछित लक्ष्यों को पूर्ण किया जाए। विद्यालयों में बड़ी कक्षाओं के बच्चों को पेरट, फ्लावर, टीचर आदि अंग्रेजी के शब्द की स्पेलिंग न आना शर्मनाक है क्योंकि यह तो सामान्य (बेसिक) ज्ञान ही है। साथ ही उन्होंने विद्यालयों में रद्दी सामान व कबाड़ कमरो में भरा रखने के बजाय उनका समिति बनाकर निस्तारण करने की बात कही एवं विद्यालयों में शौचालय निर्माण, शौचालय पर दरवाजों व साफ-सफाई की व्यवस्था के साथ पानी की टंकी का निर्माण भी आवश्यक बताया। जिससे विद्यार्थी शौचालय के महत्व को समझकर अपने अभिभावकों को घरांे में शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करे।

राष्ट्रपिता का प्रसंग सुनाकर किया प्रेरित

कलक्टर डॉ. सिंह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने आजादी से 50 वर्ष पूर्व एक अधिवेशन में भाषण देना इसलिए छोड़ दिया क्योंकि अधिवेशन स्थल के समीप ही इसमें शामिल होने आए लोग खुले में शौच जा रहे थे। तब राष्ट्रपिता ने कहा था कि आजादी से पूर्व देश को खुले में शौच से आजादी की आवश्यकता है। इस प्रकार जिले के सभी संस्थाप्रधान एक अभियान के तहत शिक्षकों, विद्यार्थियों व आमजन को खुले में शौच की बुराई को समाप्त करने हेतु कार्य करेंगे तो जिले से इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने में सफलता प्राप्त होगी।

इस अवसर पर कलक्टर डॉ. सिंह ने विद्यालयों मंे प्रार्थना के समय विद्यार्थियों को स्वच्छता व स्वास्थ्य की सीख के साथ खुले में शौच की बुराई से अवगत कराने हेतु संस्थाप्रधानों से संकल्पबद्ध होकर कार्य करने की बात कही। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी पांचूराम सैनी, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी रामकरण नागर, कन्हैयालाल देदवाल, प्रधानाचार्य, शिक्षक आदि मौजूद थे।

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