फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों ने योगी से मांगी पहचान

वर्ल्ड स्ट्रीट चिल्ड्रन डे की पूर्व संध्या पर बच्चों ने निकाली रैली

सरकार के पास नहीं है ऐसे बच्चों का ब्यौरा

अजहर अमरोही, लखनऊ, N.I.T : योगी जी हमें पहचान दो, हमें भी नाम दो, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान दो …ये उन बच्चों की करूण पुकार है जो सड़क, फुटपाथ, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड और झुग्गियों में रहते हैं। मंगलवार को इंटरनेशनल स्ट्रीट चिल्ड्रन डे की पूर्व संध्या पर महफूज संस्था के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रीजनल को-आर्डिनेटर नरेश पारस की अगुवाई में ऐसे बच्चों ने सदर तहसील से साई की तकिया डीएम आवास तक रैली निकालकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी पहचान मांगी। सरकारी छुट्टी होने के कारण बच्चों की मुलाकात जिलाधिकारी से नहीं हो सकी।

सड़क, फुटपाथ, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड और झुग्गियों रहने वाले बच्चों की कोई पहचान नहीं है। शासन प्रशासन के पास भी ऐसे बच्चों का ब्यौरा नहीं है। अत्यंत असुरक्षित हिस्सा है, क्योंकि परिस्थितियों की वजह से वे यहां रहने को मजबूर होते हैं, जहाँ कोई सुरक्षा, निगरानी व देखरेख सम्बन्धित वयस्कों से नहीं मिलता। सड़क के बच्चे नामक शब्द सड़क पर रहने वाले बच्चों के विभिन्न समूहों को समाहित करता है जो अलग परिस्थितियों और विभिन्न कारणों से आये है। प्रायः ये बच्चे रेलवे प्लेटफार्म, बस स्टेशन, गलियों, ट्रैफिक सिंग्नल और धार्मिक जगहों पर पाए जाते हैं। जीने के लिए इन्हें भीख मांगना, चोरी करना, जूते चमकाने, खाने की दुकानों और होटलों में इत्यादि काम करना पड़ता है।

आगरा में हजारों की संख्या में इस प्रकार के बच्चे हैं। इन बच्चों का प्रशासन के पास कोई ठोस ब्यौरा नहीं हैं। इन बच्चों की अपनी कोई पहचान नहीं है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम का भी इनको लाभ नहीं मिल पा रहा है। इंटरनेशनल स्ट्रीट चिल्ड्रन डे पर बच्चों ने महफूज संस्था के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माग की कि  –

1. सड़क, रेलवे स्टेशन, फुटपाथ, बस स्टेंड, ट्रैफिक सिग्नल, झुग्गी-झोपड़ियों और धार्मिक स्थानों पर रहने वाले बच्चों को चिन्हित कर इनका ब्यौरा एकत्रित किया जाए।

2. इन बच्चों के आधार कार्ड बनवाए जाएं।

3. जो बच्चे शिक्षा का अधिकार अधिनियम कानून के दायरे में आते हैं उन बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया।

4. एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की मदद से सड़कों पर भीख मांगने वाले इन बच्चों को मुक्त कराकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

5. पंचर जोड़ने वाला ट्यूब, व्हाइटनर, आयोडेक्स आदि के माध्यम से बच्चों को नशीली चीजें बेची जा रही हैं। बच्चे नशे के दलदल में फंसते जा रहे हैं। मद्य निषेध विभाग एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की मदद से इन बच्चों को मुक्त कराया जाए। इनकी काउंसलिंग कराई जाए तथा इन बच्चों को नशा मुक्ति केन्द्र भिजवाया जाए।

बुधवार को नरेश पारस बच्चों के डेलीगेशन के साथ जिलाधिकारी गौरव दयाल से मुलाकात करेंगे। नरेश पारस के साथ सुरेन्द्र सिंह, प्रदीप कुमार, रोबिन जैन, हरी आदि मौजूद रहे.

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