अलीगढ़, N.I.T  : एएमयू के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक सर्जन 2017 की यूपी एंड उत्तराखंड चेप्टर की चौथी वार्षिक कांफ्रेंस हुई। इसमें बच्चों की बीमारियों पर बाल रोग सर्जनों ने विस्तार से चर्चा की। कांफ्रेंस में 150 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस मौके पर पत्रिका का विमोचन किया।

केजीएमयू की पूर्व कुलपति व बीएचयू आयुर्विज्ञान संस्थान में प्रो. एमेरेटस पद्मश्री सरोज चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि जनसंख्या वृद्धि से बच्चों में जन्म विकृति संबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं। चिकित्सकों से कहा कि वह स्टेम सैल रिसर्च और इंजीनियरिंग में सहयोगात्मक शोध पर भी अपना ध्यान केंद्रित करें।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक सर्जन्स के अध्यक्ष प्रो. एसएन कुरील ने कहा कि विश्व रैंकिंग में एशिया के पचास मेडिकल कॉलेजों में भारत का कोई कॉलेज शामिल नहीं है। एएमयू की मेडिसिन फैकल्टी के डीन प्रो. एम अमानउल्लाह खान ने कहा कि यह काफ्रेंस बच्चों व नवजात शिशुओं की सर्जीकल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगी।

मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल एंड सीएमएस प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि जन्म विकृतियों का उपचार कर पीडियाट्रिक सर्जन्स मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयोजन सचिव प्रो. आरएस चाना ने बताया कि चिकित्सकों को आपसी विचारों व अनुभवों के आदान-प्रदान में सहायता मिलेगी। यूपी एंड उत्तराखंड चैप्टर के उपाध्यक्ष डॉ. रवि काले और आगरा के प्रो. राजेश गुप्ता ने भी संबोधित किया।

बच्चों की जांच व इलाज के बेहतर इंतजाम जरूरी

मीडिया से बातचीत में सरोज चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि मां-बाप के गोत्रों में शादी न करने की ¨हदू धर्म में भले ही और वजह हों, लेकिन खास वजह है कि इन गोत्रों में शादी के बाद दंपती से होने वाली संतान में बीमारियां कम होती है। नजदीकी रिश्तों में शादी के बाद संतान में बीमारियां होने की खास वजह यही है। डॉ. सरोज ने कहा कि अस्पतालों में बच्चों के इलाज के बेहतर इंतजाम होने चाहिए। आजकल बढ़ता वायु प्रदूषण और रासायानिक खाद के प्रयोग से बच्चों में श्वसन संबंधी और कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना अधिक है। बच्चों में कई बीमारियां ऐसी हैं, जिनकी जांच के अभाव में जानकारी नहीं हो पाती है।

गंभीर बीमारियों पर कराना पड़ता है गर्भपात : प्रो. रवि

यूपी-उत्तराखंड चेप्टर के वाइस प्रेसीडेट व प्रख्यात शिशु शल्य चिकित्सक मेजर जरनल प्रो. रवि काले ने कहा कि कई बीमारियां ऐसी हैं, जिनके कारण गर्भपात कराना पड़ता है। रोबोटिक्स सर्जरी और गर्भ में रहकर शिशु का इलाज क्रांति है। स्पाइनल डिसरेफिज्म (रीढ़ की हड्डी न बनना), दिमाग न बनना(एननकैफेली) के अलावा किडनी न बनना जैसे अंगों की कमी के कारण बच्चे जिंदगी भर इलाज के अभाव में रहने के कारण दम तोड़ जाते हैं। जिस अंग का ऑपरेशन करना होता है, वहां उसके आसपास तीन या चार पोर्ट (छेद बनाकर) अंदर रोबोटिक्स सर्जरी की जाती है। इसमें 360 डिग्री अंदर ही अंदर घूमकर ऑपरेशन किया जाता है।

योगी ने जताई खुशी, भेजा संदेश

कांफ्रेंस के आयोजन पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने मेडिकल में बाल रोग विभाग को भेजे संदेश में कहा है कि बच्चों का स्वास्थ्य समाज के विकास के लिए आवश्यक है और उसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। विश्वास है कि कांफ्रेंस में बच्चों की देखभाल से संबंधित नई जानकारी उसमें भाग लेने वालों को मिलेगी। बाल रोग विभाग के प्रो. आरएस चानना ने बताया कि मेडिकल के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी मुख्यमंत्री ने संदेश भेजा है।