सुबह सूरज की रोशनी मुझे मजबूर कर देती है कि आंखें खोलूं। सूरज हर रोज अपने ठीक वक्त पर आ जाता है। अगर सूर्योदय के बाद भी मैं सोता रहूं और यह सोचकर दिल को दिलासा देता रहूं कि सो जा राजीव, अभी तो रात बहुत बाकी है! तो इसमें दोष मेरा है, सूरज का नहीं। वह हर रोज अपने वक्त पर आता रहेगा, अपने रास्ते चलता रहेगा। उसे परवाह नहीं कि किसकी नींद टूटती है और किसकी जारी रहती है। उसे आपके और मेरे हुक्म की जरूरत नहीं है।

मुझे याद है, आज से करीब 20 साल पहले हर सुबह मेरी आंखें अज़ान सुनकर खुलती थीं। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। सुबह-सुबह अज़ान दिलो-दिमाग को ऊर्जा से भर देती। अज़ान के बाद आरती की बारी आती। मंदिर से धूप और दीपक की सुगंध आरती को और मधुर एवं असरदार बना देती। मेरा न कभी आरती से वैर रहा और न ही अज़ान से कोई दुश्मनी। मुझे दोनों ही बहुत प्रिय हैं। अज़ान मेरे दिल का सुकून और आरती मेरे मन की ताकत।
रोज की तरह आज सुबह जब मैं नींद से उठा तो एक खास खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। संगीत की दुनिया के एक बहुत बड़े नाम सोनू निगम अज़ान से सख्त खफा हैं। उनका कहना है कि सुबह-सुबह उनकी नींद खराब न की जाए। निगम साहब ने आगे फरमाया है कि यह तो साफ-साफ गुंडागर्दी है। उन्हीं के शब्दों में, जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो उस दौर में बिजली नहीं थी। फिर यह शोर-शराबा क्यों?
सोनू निगम ने जो कहा, ये उनके निजी विचार हैं। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन वे कई गलतियां कर गए। पहली बात तो यह कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस्लाम नहीं बनाया था। इस्लाम अल्लाह का दीन है जिसके वे पैगम्बर हैं और पैगम्बर भी आखिरी।

निगम साहब को दिक्कत इस बात को लेकर है कि अज़ान से उनकी नींद में बाधा आती है। मेरा मानना है कि मंदिर हो या मस्जिद, उसके लाउड स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि दूसरे आसानी से सुन सकें, उन्हें परेशानी न हो। आमतौर पर मस्जिदों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। मस्जिदों में लाउड स्पीकर की ध्वनि का स्तर साधारण ही होता है।

अब बात करते हैं नींद में रुकावट की। मुंबई में फज्र की प्रार्थना का समय सुबह 5.05 बजे है। यह ऐसा वक्त नहीं होता कि लोग गहरी नींद में सोए हों और प्रार्थना भी कितनी देर के लिए! मुश्किल से तीन-चार मिनट। माना कि निगम साहब इस दौरान गहरी नींद में सोए हों, लेकिन यह भी संभव है कि उसी दौरान उस इलाके में हजारों लोग ऐसे हों जिनके लिए अज़ान नींद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।

निगम साहब बहुत बड़े और दौलतमंद शख्स हैं। सुकून से नर्म बिस्तर पर सोते होंगे, लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी गरीब लोग हैं जो चटाई को बिछौना और हथेलियों को तकिया बनाकर सोते हैं। हर सुबह उनकी आंखें अज़ान सुनकर ही खुलती हैं। इसके बाद वे जल्दी-जल्दी अपने काम-धंधे में जुट जाते हैं। अज़ान उनके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। ऐसा अलार्म जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

इसलिए निगम साहब को मेरा सुझाव है कि वे अपने आलीशान बंगले के बेडरूम में साउंड प्रूफ सिस्टम लगवा लें, क्योंकि उनकी खुशी के लिए अज़ान का वक्त तो बदलने वाला नहीं।

चलते-चलते निगम साहब से मेरा एक सवाल। माना कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जमाने में बिजली नहीं थी, लाउड स्पीकर नहीं थे और भी कई चीजें नहीं थीं। वह जमाना और था, ये जमाना और है। लेकिन हुजूर, हमने सुना है कि भारत में संगीत की जड़ें सामवेद से जुड़ी हैं। संगीत का पहला सुर सा सामवेद ने दिया था।

शिव के डमरू, कृष्ण की मुरली, नटराज की मुद्राओं से होता हुआ संगीत आज आपके युग में पहुंचा है। मैं आपसे पूछता हूं, ये हवाई जहाज, स्मार्टफोन, गाड़ी, ट्विटर, फेसबुक वगैरह उस जमाने में तो नहीं थे। फिर आप इस जमाने में इन्हें क्यों ढो रहे हैं? जींस-टी शर्ट छोड़कर धोती पहना करें।

क्यों नहीं इन्हें छोड़कर उसी सदियों पुराने जमाने में लौट जाते? आज ही अपना स्मार्टफोन दीवार पर दे मारें या किसी गरीब को दान कर दें। बॉलीवुड के बड़े लोग रात को पार्टियां करें और दिनभर नींद में खोए रहें तो यह आम लोगों की जिम्मेदारी नहीं कि वे उनकी नींद की हिफाजत करें। कसूर अज़ान का नहीं, आपका है। कृपया वक्त पर सोया करें। शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –