पढ़े क्यों विनोद खन्ना हमेशा याद रहेगे ?

kvjlwuzfbs-1491583377मुम्बई, N.I.T : जय उल्लाल विनोद खन्ना के करीबी मित्रों में रहे हैं. तीस साल तक मशहूर जर्मन पत्रिका स्टर्न के साथ काम करने वाले सीनियर फोटो जर्नलिस्ट उल्लाल उन गिने-चुने पत्रकारों में से एक हैं जो इस अभिनेता से तब मिले जब वे ओशो (रजनीश) के ओरेगन स्थित कम्यून में रह रहे थे. यह 1980 की बात है जब अमेरिका के ओरेगन प्रांत में ओशो ने टेंट से बना एक शहर ही बसा लिया था.

रजनीश के अनुयायी बनने वाली हस्तियों में विनोद खन्ना सबसे मशहूर हैं और यह दौर उनकी जिंदगी का सबसे पेचीदा और कम जाना गया हिस्सा है. सन 1982 में विनोद खन्ना ने संन्यास लेकर फिल्मों में काम करना भी छोड़ दिया था. अपनी पहली पत्नी गीतांजलि और बेटों राहुल-अक्षय को छोड़कर वे रजनीश के भक्त बन गए थे. समर्पण इतना आगे बढ़ा कि फिर वे रजनीशपुरम कम्यून शामिल हो गए और ओरेगन में रहने लगे. साल 1985 में रजनीश को अमेरिका से निर्वासित कर दिया गया. अब रजनीश अपने पुणे स्थित मुख्य आश्रम में लौट आए. इसी बीच विनोद खन्ना ने उनका आश्रम छोड़ दिया और 1987 तक उनकी फिल्मों में भी वापसी हो गई.

अगस्त 1973, हैमबर्ग में विनोद खन्ना अपनी पहली पत्नी गीतांजलि के साथ. फोटो क्रेडिट : जय उल्लाल
अगस्त 1973, हैमबर्ग में विनोद खन्ना अपनी पहली पत्नी गीतांजलि के साथ. फोटो क्रेडिट : जय उल्लाल

यह फोटो विनोद खन्ना की हैमबर्ग (जर्मनी) यात्रा का है. New India Times  की सहयोगी वेबसाइट स्क्रॉल से बात करते हुए उल्लाल बताते हैं – ‘मेरी पत्नी रजनी और मैं, विनोद खन्ना और उनके परिवार के बहुत करीब रहे हैं. अगस्त 1973 में वे अपनी पत्नी गीतांजलि के साथ हमसे मिलने हैमबर्ग आए थे और दो दिन तक हमारे साथ रहे. तब तो हमारा घर भी पूरी तरह नहीं बना था.’ रजनीशपुरम के अनुभव के बारे में उल्लाल कहते हैं – ‘कई सालों बाद, जब मैं जर्मन वीकली मैगजीन स्टर्न के लिए रजनीश आश्रम पूना में एक स्टोरी कर रहा था, तब मैं उनसे (विनोद खन्ना से) दो बार मिला. मैंने बाद में ओरेगन रजनीशपुरम में भी उनकी तस्वीरें खींची.’

खन्ना रजनीशपुरम में बागबानी का काम करते थे. उल्लाल आगे बताते हैं, ‘वे रजनीश के इनर सर्किल में रहने वाले कुछ गिने-चुने लोगों में से एक थे. मैं तीन बार ओरेगन गया और हर बार विनोद से मिला. हर बार उनका रवैया खुशमिजाज और दोस्ताना रहा. एक सुंदर सी मुस्कुराहट हमेशा उनके चेहरे पर रहती थी.’

फोटो जर्नलिस्ट उल्लाल जब-जब मुंबई आते थे, विनोद खन्ना से जरूर मिलते थे. खन्ना को याद करते हुए वे कहते हैं – भगवान रजनीश के बारे में खन्ना ने एक बात कही जो मुझे अब भी अच्छी तरह याद है. उन्होंने कहा था कि ‘जय, रजनीश इकलौते जीते-जागते भगवान हैं’. और इस पर मेरा जवाब था कि विनोद, जितना मैं जानता हूं तुम इकलौते जीते-जागते अभिनेता हो जो संबुद्ध (जिसे आत्मज्ञान प्राप्त हो गया है) भी है.

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