अब रणबीर निर्माता बनेंगे और ऋषि कपूर हेडमास्टर!

58129-uqftccmzyg-1494712976मुम्बई, N.I.T : राज कपूर के आरके बैनर को जीवित करने का बोझ कपूर खानदान में कोई नहीं उठाना चाहता! इसीलिए शायद फिल्म निर्माण में उतरने की चाहत रखने के बावजूद रणबीर कपूर ने जब पहली बार निर्माण संस्था खोली तो अनुराग बसु के साथ ‘पिक्चर शुरू’ के नाम से खोली. ‘बर्फी’ के सह निर्माता होने के बाद आने वाली ‘जग्गा जासूस’ के भी सह निर्माता बने और अब खबर है कि वे पूरी तरह अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खोलने का मन बना चुके हैं. लेकिन इसका नाम आरके बैनर शायद ही रखें!

संजय दत्त की बॉयोपिक के अलावा इस समय वे अयान मुखर्जी की ‘ड्रैगन’ में बिजी हैं. बताया जा रहा है कि इसके बाद वे अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस खोलेंगे और उसकी फिल्मों में हीरो बनेंगे. पहली फिल्म उनके ही हीरोइज्म को ध्यान में रखकर लिखी जाएगी और उसके बाद बनने वाली फिल्मों में वे अपने ढेर सारे ‘कपूर’ भाईयों को मौका देंगे. उनके दोस्त अयान मुखर्जी इस निर्माण संस्था के लिए पक्का ही फिल्म बनाएंगे और ‘प्यार का पंचनामा’ बनाने वाले लव रंजन के साथ भी रणबीर कपूर जल्द एक फिल्म करेंगे. यह भी कहा जा रहा है कि ऋषि कपूर भी इस निर्माण संस्था से जुड़ेंगे और हेडमास्टर की भूमिका अदा करेंगे. अर्थात् पैसों की निगरानी का जिम्मा उनके पास होने के साथ ही कहानी, हीरो-हीरोइन और निर्देशक को भी वे ही हरी झंडियां दिखाएंगे और उनकी हां के बिना इस प्रोडक्शन हाउस में पत्ता भी नहीं हिलेगा.

ट्विटर पर उन्हें फॉलो करने वाले समझ ही गए होंगे कि यह हेडमास्टरी वे संटी से हाथ लाल कर देने वाले स्तर की करेंगे!

जो काम अक्षय कुमार नहीं कर सके वह अभिषेक बच्चन करेंगे!

अभिषेक बच्चन जितने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं, काश कि उनका फिल्मी करियर भी उतना ही एक्टिव होता. 2016 में उनकी इकलौती फिल्म तीन हीरो वाली ‘हाउसफुल 3’ थी, 2015 में इकलौती ‘ऑल इज वेल’, 2014 में इकलौती ‘हैप्पी न्यू ईयर’ और 2013 में इकलौती ‘धूम 3’. 2017 में अभी तक उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है और उन्होंने पिछले पांच महीने में किसी भी फिल्म की शूटिंग नहीं की है.

हालांकि वे ‘सरकार 3’ में एक बड़ी फोटो बनकर बच्चन के ड्राइंगरूम में टंगे रहते हैं, और इसको लेकर सोशल मीडिया उन पर तंज भी कस रहा है, लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि ‘सरकार’ और ‘सरकार राज’ में उनका काम दर्शनीय था. ‘बोल बच्चन’ में भी उन्होंने दर्शकों को लुभाया था और ‘गुरू’ व ‘युवा’ के अभिनय के तो क्या ही कहने! इसलिए अभिषेक बच्चन का खाली बैठना बड़े बच्चन को ही नहीं, उन दर्शकों को भी नहीं सुहा रहा जो उनमें अभी भी एक संभावनाशील अभिनेता देखते हैं.

फिलहाल उन दर्शकों के लिए खुशी की दो बात आई हैं. खबर है कि जूनियर बच्चन बटला हाऊस एनकाउंटर पर आधारित एक फिल्म करने जा रहे हैं जिसे ‘डी-डे’ बनाने वाले निखिल आडवाणी निर्देशित करेंगे. पहले इस फिल्म से अक्षय कुमार जुड़े हुए थे लेकिन यह समझते ही कि विवादास्पद रहे बटला हाऊस एनकाउंटर पर कोई कहानी कहने से वे बेवजह कानूनी पचड़ों में फंस जाएंगे, उन्होंने फिल्म से किनारा कर लिया. अब यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अभिषेक की झोली में गया है और कहा जा रहा है कि वे इन दिनों काफी खुश है.

इस फिल्म के अलावा अभिषेक, राम गोपाल वर्मा की एक एक्शन आधारित फिल्म भी करने जा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने 12 किलो वजन कम किया है और एक पुलिस वाले की कहानी कहने वाली यह फिल्म जल्द ही उन्हें लेकर फ्लोर पर जाने वाली है. अभिषेक को अब दुआ बस इतनी मांगनी है कि रामू संजय दत्त वाली ‘डिपार्टमेंट’ दोबारा न बना दें, और उनके करियर पर पर्मानेंट सील न लगा दें!


‘सोशल मीडिया वाहियात जगह है. आपको लगता जरूर है कि इंटरनेट दुनियाभर की अलग-अलग चीजों से आपको रूबरू करा रहा है, लेकिन असलियत में यह जगह आपको वही चीजें बार-बार देती है जिन्हें वो आपके लिए सही समझती है. यह एक कैद है जो दुर्भाग्य से, लोगों को बेवकूफ बनाती है.’

— इरफान खान, इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में


फ्लैशबैक : जब मीना कुमारी पर फिल्माए गए एक अमर गीत में वे होकर भी नहीं थीं!

‘पाकीजा’ (1972) को बनने में लगभग 14 साल लगे थे. कमाल अमरोही की ख्वाबो-खयाली थी कि जिस तरह शाहजहां ने अपनी पत्नी के लिए ताजमहल बनवाया, वे भी अपनी पत्नी मीना कुमारी के लिए ‘पाकीजा’ बनाएं. ‘पाकीजा’ ने इसके आसपास की मशहूरियत हासिल भी की और मीना कुमारी की मौत की वजह से इस फिल्म को देखने के लिए दर्शक टिकिट खिड़कियों पर टूट पड़े. लंबी बीमारी के बाद दम तोड़ने वाली मीना कुमारी की यह आखिरी फिल्म कहलाई और इसी फिल्म के लिए उन्होंने अपने जीवन का आखिरी फिल्म प्रीमियर भी अटेंड किया. कहते हैं, यहीं पर,‘पाकीजा’ देखने के बाद किसी मशहूर हस्ती ने उनसे कहा था, ‘शाहकार बन गया!’

इस कल्ट फिल्म के बनने के दौरान कई बार फिल्मांकन बाधित हुआ. कमाल अमरोही और मीना कुमारी अलग हो गए और तीखी तकरार के बाद जब वापस काम शुरू हुआ तब मीना गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं. शूटिंग रुक-रुककर होने लगी और शारीरिक थकान देने वाले कई गीतों में मीना कुमारी की जगह उनकी बॉडी डबल का उपयोग हुआ. इन दृश्यों में या तो कपड़े से छिपा चेहरा दिखाया गया, या लॉन्ग शॉट से काम चलाया गया, या फिर सिर्फ चेहरे के क्लोजअप शॉट्स ही मीना कुमारी पर फिल्माए गए. ऐसे दृश्यों में पद्मा खन्ना नामक अभिनेत्री उनकी बॉडी डबल बनीं, जिन्होंने ‘पाकीजा’ के रिलीज होने के अगले साल अमिताभ बच्चन संग ‘सौदागर’ (1973) में नायिका की भूमिका निभाई.

बॉडी डबल के इस उपयोग के बावजूद ‘पाकीजा’ के तकरीबन सारे ही गीतों और मुख्य दृश्यों में मीना कुमारी मौजूद रहीं – आखिरकार, इस फिल्म में किए गए अभिनय को उनके श्रेष्ठतम कामों में ऐसे ही नहीं गिना जाता. सिवाय एक गीत के, जिसमें वे होकर भी नहीं थीं!

चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो नामक गीत मीना के राज कुमार के सीने से लगकर रोने के बाद शुरू होता है और साढ़े तीन मिनट लंबे इस कालजयी गीत के दौरान जहां मीना कुमारी नायक की बांहों में लिपटी रहती हैं, वहीं नाव में बैठकर नदी पार करते हुए राज कुमार उन्हें चांद के पार ले जाने की कसमें खाते हैं. यह पूरा गीत मीना कुमारी की बॉडी डबल पर शूट हुआ था और एक क्षण के लिए भी इस गीत में मीना का चेहरा नजर नहीं आता है. नीचे दिए गए वीडियो में देखिए, फिल्म में गीत से ठीक पहले आने वाला इमोशनल सीन तब शूट हुआ था जब मीना कुमारी का स्वास्थ्य बेहतर था, इसलिए इसमें मीना भावपूर्ण अभिनय कर रही हैं. लेकिन इस सीन से लगे हुए गीत का फिल्मांकन लंबे अरसे बाद होना तय हुआ और उस दौरान मीना कुमारी का स्वास्थ्य इतना ज्यादा खराब हो गया कि सिर्फ चेहरे का क्लोजअप भर शूट करने के लिए भी वे सेट पर नहीं जा पाईं.

‘चांद के पार चलो’ फिर भी अमर हुआ, और मीना कुमारी का ही गीत कहलाया. यह कमाल कमाल अमरोही की वजह से मुमकिन हुआ, जिन्होंने अलग होने के बाद भी मीना कुमारी को इतना चाहा कि उन्हें ‘पाकीजा’ नाम का ताजमहल तोहफे में दिया.

‘चांद के पार चलो’ का एक वर्जन फिल्म के बाकी गीतों के मिजाज का भी रिकार्ड हुआ था. ड्यूट न होकर सिर्फ लता मंगेशकर की आवाज में कुछ इस सेमी-क्लासिकल अंदाज में, कि मीना उस पर भी ‘पाकीजा’ के दूसरे नृत्य-गीतों की तरह बेमिसाल नृत्य कर सकें. लेकिन उनकी शराबनोशी और बीमारी ने यह होने नहीं दिया और यह वर्जन सिर्फ याद बनकर रह गया.