यूपी सरकार का सर्व शिक्षा अभियान का सपना कैसे होगा पूरा, बच्चो को अभी तक नही मिली किताबे

सलमान अहमद, शमशाबाद/फर्रुखाबाद, N.I.T :
नया शिक्षा सत्र जुलाई 2017 न ही किताबे न ही बुक स्टाल पर किताबे आखिर कैसे साकार होगा यूपी सरकार का सर्व शिक्षा अभियान का सपना उधर शिक्षण कार्य को लेकर मायूस अभिभावक नगर की बुक स्टालों पर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर प्रशासन बेखबर जानकारी के अनुसार नया शिक्षा सत्र जुलाई 2017 प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय के अलाबा प्राइवेट उच्च प्राथमिक विद्यालयो में शिक्षण कार्य आरम्भ हो चुका है लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं के चेहरों पर मायूसी के देखे जा रहे हैं क्योंकि उनके पास पढ़ने के लिए पाठ्यक्रम की पुस्तके ही नहीं है इस संबंध में जब जानकारी की गई तो कई लोगो ने बताया है क़ि उच्च प्राथमिक विद्यालय जहां प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में समान शिक्षा के अंतर्गत जो पाठ्य पुस्तकें उन्हें उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी वह पाठ्यपुस्तके छात्र-छात्राओं को ढूंढे मिल ही नहीं रही है इस संबंध में कस्बे में स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय यहां के एक शिक्षक नाम नही छापने की शर्त पर बताया की नया शिक्षा सत्र 2017 आरंभ जरूर हो चुका है वही स्कूलों में शिक्षण कार्य भी आरंभ हो चुका है लेकिन दुख इस बात का है क़ि प्रशासन द्वारा अभी तक पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई है जिससे सभी स्कूलों में शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है
इस सम्बन्ध में इस प्रतिनिधि को जानकारी में यह भी बताया गया है क़ि उच्च परिषदीय विद्यालयो में जो पाठ्य क्रम की पुस्तिकों का प्रचलन है वही पाठ्य क्रम प्राइवेट उच्च स्कूलों में भी है अभिभावक का कहना था क़ि उच्च प्राथमिक स्कूलों में तो पिछले वर्ष उपलब्ध करायी गयी पाठ्य क्रम की पुस्तिके जिनका वितरण के उपरांत शेष रही पुस्तको से भी कम चल जाता है या फिर जो छात्र छात्राएं उत्तीर्ण हुए है उनकी भी पाठ्य क्रम की पुस्तिको से काम चल जाता है लेकिन प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में पड़ने वाले छात्र छात्राएं आखिर क्या करें उन्हें न तो बुक स्टालों पर ही किताबे मिल रही है न ही कही और से परिणाम कहने के लिये भले ही शिक्षण कार्य आरम्भ हो गया हो लेकिन किताबो के लिये आज भी छात्र छात्राएं और अभिभावकों को मायूस होकर घर लौटते हुए देखा जा रहा है ।
इस अम्बन्ध में रामचरण सुंदर लाल दयाराम ब्रजेश कुमार रामबहादुर राजपूत सीताराम सहित कई लोगो ने बताया क़ि सरकार को चाहिए की अगर इन प्राइवेट स्कूलों को शिक्षा क्षेत्र में शरण दी है तो उन्हें पाठ्य क्रम की पुस्तको को भी उपलब्ध कराये जिससे ग्रामीण क्षेत्र के इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भी शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो सके और उनके भी बच्चे शिक्षित हो सके
लोगो का कहना है क़ि अगर प्राथमिक तथा उच्च स्कूलों की शिक्षा ब्यबस्था की हालत कितनी अच्छी है यह तो हर कोई जनता है कहने की जरुरत नहीं है क्योकि अगर इन स्कूलों की शिक्षा ब्यबस्था अच्छी होती तो गुरु जी के बच्चे बाहर के नामी गिरामी स्कूलों में नहीं पढ़ते जब जिम्मेदार लोगो के बच्चे ही बाहर के स्कुलो में पढ़ेंगे तो उनके बच्चों का क्या होगा शायद इसी लिये बो अपने बच्चों का एडमिशन प्राथमिक अथबा उच्च प्राथमिक स्कूलों में न कराकर प्राइबेट पब्लिक स्कूलों में कराकर उच्च शिक्षा के लिये कड़ा संघर्ष कर रहे है उनका मतलब बिद्यालय में मध्यान भोजन या छात्रवृत्ति से नहीं है बल्कि उच्चशिक्षा है जिसे पाकर उनके भी बच्चे शिक्षित जो सके
हलाकि जिन परेशानियो के साये में जूझ रहे है बे बास्तबिक जटिल है और कब समाधान होगा कुछ कहा नहीं जा सकता बैसे भी एक शिक्षक का कहना है क़ि
अभी तक परिषदीय स्कूलों को किताबे उपलब्ध नही हुई है
उधर परिषदीय उच्च परिषदीय विद्यालयो में पढ़ने बाले छात्र छात्राएं के अभिबाबको ने प्रशासन से छात्रों की इस समस्या का समाधान जल्द कराये जाने की मांग की है

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