नोटबन्दी के एक साल बाद में भी नहीं सुधरा आर्थिक विफलता का विनाश, प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के सामने हुए अक्षम साबित : एसडीपीआई

फ़िरोज़ खान, कोटा, N.I.T : सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इण्डिया की राजस्थान प्रदेश इकाई की ओर से नोटबंदी की नाकामी के एक वर्ष पर ‘‘नोटबंदी जवाबदेही दिन‘‘ के रूप में आज देश सहित प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया गया। तथा एसडीपीआई ने नोटबंदी की नाकामी पर प्रधानमंत्री जवाब दो का नारा दिया। इसी कड़ी में एसडीपीआई की कोटा जिला कमेटी की और से सुबह 11ः30 बजे छावनी स्थित चैपाटी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के जिलाध्यक्ष जफर चिश्ती ने संबोधित करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गत 8 नवंबर 2016 को देश में नोटबंदी की घोषणा करने के एक साल गुजर जाने के बाद भी देश के आर्थिक संकट की विफलता को रोकने एवं सुधार के लिए कोई भी ठोस उपाय नहीं किये जिससे आम नागरिकों की अर्थव्यवस्था तो चौपट हुई ही है साथ ही विकास की गति भी थम सी गई है। नोटबंदी के एक साल के इस दौर से ना तो कोई सकारात्मक परिवतर्न ही आया और ना ही इससे आर्थिक विनाश पर कोई नियंत्रण हुआ। नोटबंदी के इस परिणाम को राष्ट्रीय कलंक मानते हुए इसके खिलाफ एसडीपीआई आज दिनांक 8 नवम्बर 2017 को देश भर में ‘‘नोटबंदी जवाबदेही दिवस‘‘ Demonetization Accountability Day  रूप में मनाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा। इस दौरान पूरे राजस्थान भर में धरने व विरोध प्रदर्शन किये गए।

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि पिछले साल 8 नवंबर को अचानक आधी रात नोटबन्दी की घोषणा ने पूरे देश को हैरान कर दिया और आम लोगों को उनकी मेहनत की कमाई के रुपयों के बदलें असाधारण और अप्रिय समस्याओं का सामना करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय जनता को इस बात का विश्वास दिलाया था कि उनका यह नोटबन्दी का फैसला ऐतिहासिक निर्णय है और यह भी कहा था कि अगर उनका यह कदम असफल होगा तो उसके लिए वह जवाबदेह होंगे और जनता उन्हें जो सार्वजनिक दण्ड देगी उसको वे स्वीकार करेंगे। जबकि नोटबन्दी के कारण देश को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा और नोटबन्दी किये जाने के कदम की पेशकश के कारण बिल्कुल निराधार साबित हुए हैं। नोट हटाए जाने के बाद पूरे देश ने देखा कि आम जनता, महिलाओं, बच्चे, बुजुर्ग, विकलांगों को रात दिन कतारों में खड़ा रहना पड़ा जबकि अमीर क्षेत्रों, कॉर्पोरेट्स, मंत्रियों और नौकरशाहों को जनता ने, कभी वहां खड़े नहीं

देखा बल्कि उन्होंनें ने बैंकों के पिछले दरवाजे से बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके भारी मात्रा में नोट बदली करवा लिए।

जिला महासचिव नावेद अख्तर ने प्रदर्शन में कहा कि नोटबन्द किये जाने के एक साल बाद भी सरकार न ही काले धन के खाते पहचान पाई हैं और न ही नकली नोटें को  जब्त किया गया है। ध्यान दें कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए नोटबंदी की घोषणा को बेजोड़ बताया गया था। परन्तु इसका भी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आया। नोटबन्द करने के कारण पूरा देश को कैशलेस करने की घोषणा की गई थी परन्तु इसकी विफलता से इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया। नरेंद्र मोदी के भक्तों ने इस तानाशाही कदम को एक ऐतिहासिक और मजबूत कदम बताया, और  कहा गया था कि इससे पहले ऐसा कोई बोल्ड फैसला नहीं लिया गया था। अगर ऐसा ही था तो नोटबंदी के बाद रोजाना सरकार के द्वारा नये नये नियम जारी होते थे जो कि उस दौरान विफल होते रहे और लोग अनुभवहीनता के कारण उस कदम से पीड़ित या परेशान होते रहे। हालांकि तथ्य यह है कि इससे पहले देश में इस तरह के कई उदाहरण हैं, जो कि आर्थिक विशेषज्ञों और मंत्रियों की सलाह और उचित तैयारी के साथ लिए गए थे। जबकि नरेंद्र मोदी ने सलाह लेने के लिए आर्थिक विशेषज्ञों और मंत्रियों के बिना चर्चा कर उन्हें सूचित किये बगैर इस नोटबंदी करने का निर्णय लिया और देश के लोगों को परेशान किया। जिससे कि नोटबन्दी के कारण देश की अर्थव्यवस्था नुकसान ग्रस्त हुई है और नोट हटाए जाने के एक साल बाद भी देश की अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं आया है। साथ ही छोटे बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी भारी नुकसान से नहीं निकल सके वहीं करोड़ों व्यक्ति बेरोजगार हुए हैं, निर्माण और भूमि विकास विभाग ठप हो गए हैं और इसके अलावा छोटे और बड़े व्यापारिक क्षेत्र ढहने के कगार पर आ खड़े हैं। किसान और श्रमिक वर्ग अपनी रोजी रोटी खो चुके हैं और आज की तारीख तक कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। पुलिस और इंटेलिजेंस एजेसिंयों ने इन अपराधियों के नामों को नहीं बताया है जिनके पास नोटबंदी के बाद नये नये नोटों की खेप बरामद हुई। नरेंद्र मोदी ने अपने कहे शब्दों को आसानी से भुला दिया है कि अगर नोटबन्दी विफल साबित होती है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से दंडित किया जा सकेगा ।

इस मौके पर पाॅपुलर फ्रन्ट के जिलाध्यक्ष शोएब अहमद व एसडीपीआई जिला सचिव राजा वारसी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर जिला सचिव जावेद हुसैन, कोषाध्यक्ष हाजी बून्दू, जिला सदस्य जाकिर हुसैन सहित मुबारिक हुसैन, मुजफ्फर हुसैन, हाजी शफीक, मुश्ताक सहित कई कार्यकर्ता मौजुद थे।

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