पढ़े..क्यों पेरियार को 40 साल छोटी निजी सचिव से प्यार होगया था ?

नई दिल्ली, N.I.T : ये 1949 की बात है. तमिलनाडु के किसी अखबार ने एक विस्फोटक खबर छापी. इसके अनुसार 72 साल के पेरियार और 31 साल की मनियामई ने रजिस्ट्रार आफिस में अपनी शादी के रजिस्ट्रेशन का आवेदन कर रखा है. ये खबर उस वक़्त इतनी सनसनीखेज थी कि पूरा देश अवाक रह गया. मद्रास प्रांत में इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. तरह तरह से पेरियार पर दबाव डाला गया. मनाया गया कि वो ये शादी नहीं करें, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. लोग हैरान थे कि वह अपनी उम्र से करीब 40 साल छोटी लड़की से कैसे शादी कर सकते हैं. इस लड़की का नाम था मनियामई. पेरियार ने किसी की नहीं मानी और उन्होंने दूसरी शादी कर डाली.

ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार दक्षिण भारत के बहुत ताकतवर नेता थे. उन्हें खासकर जातिपात विरोधी और समाज के दबे-कुचले वर्ग को साथ लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने के लिए जाना जाता था. वह हिंदू धर्म और ब्राह्मणवाद के प्रबल विरोधियों में थे. 1919 में जब उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता छोड़कर द्रविड कष्गम के नाम से नई पार्टी बनाई, तो ये वहां की दमदार पार्टी बन गई.

पेरियार का कद तमिल राजनीति में इतना बड़ा हो गया कि उनके आसपास भी वहां कोई दिखता नहीं था. उनकी सभाओं में खूब भीड़ जुटती थी. वो लगातार मूर्ति पूजा के खिलाफ भाषण देते थे. एक तरफ उनके विरोधियों की संख्या बढ़ रही थी, दूसरी ओर उनकी पार्टी और कैडर मजबूत होता जा रहा था. पेरियार का चिंतन क्रांतिकारी और लोगों पर असर डालने वाला था. कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं था.

पहली पत्नी का निधन, विधुर रहने का फैसला

पेरियार का जन्म तमिलनाडु के ईरोड में एक धनी व्यापारी परिवार में हुआ था. लेकिन जल्दी ही वो नास्तिक हो गए. 19 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पिता की मर्जी से पहली शादी की 14 साल की नागम्मा से. उनकी पहली पत्नी पढ़ी लिखी तो नहीं थीं लेकिन उनके साथ रहने से उन्होंने पढना लिखना सीखा बल्कि पति के साथ आंदोलन में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेती थीं. नागम्मा ऊर्जावान महिला थीं. हर तरह से पति के प्रति समर्पित. जिस तरह उन्होंने घर के बाहर भी पति का साथ दिया, उसने भी पेरियार की जमीन मजबूत की. उनके बारे में कहा जाता है कि वो काफी दोस्ताना और जमीन से जुड़ी रहने वाली महिला थीं. नागम्मा और पेरियार की एक बेटी भी हुई थी लेकिन पांच माह बाद ही वो चल बसी. इसके बाद उनके बच्चा नहीं हुआ. 1933 में नागम्मा के निधन के बाद पेरियार ने फिर कोई शादी नहीं करने का फैसला कर लिया था. वह पूरी तरह से अपने काम के प्रति समर्पित हो गए.

युवा लड़की निजी सचिव बनकर आई
1942-43 में उन्हीं की पार्टी के दिवंगत नेता कनागसाबई मुदलियार की बेटी गांधीम्मई को उन्होंने अपनी पर्सनल सेक्रटरी बना लिया. वह उस समय 20 वर्ष के आसपास की ऊर्जावान युवती थी. साथ ही पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता होने के साथ सामाजिक न्याय के प्रति समर्पित. वह पेरियार के आफिस से लेकर उनकी निजी जिंदगी के इंतजामों को देखने लगी. पेरियार जहां भी जाते, वहां वो दौरों में उनके साथ होती. पेरियार इस युवती को मनियामई कहते थे.

निजी सचिव से बढ़ीं करीबियां
मनियामई धीरे धीरे न केवल पेरियार की बेहद विश्वासपात्र बन गई बल्कि वह काफी हद तक उस पर निर्भर हो गए. वो उनकी खुराक से लेकर दवाओं तक का ध्यान रखती थी. पेरियार उससे पार्टी संबंधित चर्चाएं करने लगे और उससे तमाम मामलों में राय लेने लगे. इसी दौरान दोनों करीब आ गए. हालत ये हो गई कि पेरियार पूरी तरह निर्भर होते चले गए.

चूंकि मनियामई को पेरियार के घर में ही रहने के लिए एक कमरा मिला हुआ था, लिहाजा दोनों के संबंधों को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगनी शुरू हो गईं. लेकिन दोनों की उम्र में बड़ा अंतर होने के कारण कभी खुलेआम कुछ नहीं कहा गया लेकिन ये जरूर था कि जिस तरह मनियामई का दखल पार्टी के कामों और फैसलों में बढ़ गया था उसे लेकर पार्टी के बड़े नेता और पेरियार के बेहद करीबी भी नाखुश थे. लोग कहने लगे कि बुढापे में पेरियार अपनी युवा सचिव के प्यार में पड़ गए हैं.

मनियामई का बर्ताव हतप्रभ करने वाला था
कहा जाता है कि पेरियार अपने बाद सीएन अन्नादुरई को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाने का मन बना चुके थे, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने अपनी इरादा बदल दिया. माना गया कि ऐसा करने के पीछे मनियामई ही थीं जिन्होंने द्रविड़ कषगम के कई बड़े पार्टी नेताओं को लेकर पेरियार के मन में गलतफहमी पैदा कर दी. पार्टी नेताओं और पेरियार के मुलाकातियों के प्रति मनियामई का रवैया सख्त और रुखा होता था. द्रमुक कषगम ने बाद में अपने लेखों में उन्हें गैर दोस्ताना बताया. इसके उलट पेरियार के बहुत से पुराने सहयोगी ऐसे थे, जो उनके आंदोलनों में उनके साथ सक्रिय रहे और उनके साथ जेल गए, वो उनकी इस निजी सचिव के बर्ताव पर हतप्रभ रह जाते थे.

जिंदगी में नाटकीय बदलाव
पेरियार की निजी जिंदगी में नाटकीय बदलाव 14 मई 1949 के दिन से आना शुरू हुआ. भारत के गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी मंदिरों के शहर तिरुवन्नामलाई आए हुए थे. पेरियार अपनी युवा निजी सचिव मनियामई के साथ उनसे मिलने पहुंचे. मुलाकात एक घंटे तक चली. द्रविड़ कषगम में इस भेंट को लेकर सीनियर नेताओं के कान खड़े हो गए. द्रविड़ कषगम के महासचिव अन्नादुरई ने जब पेरियार से इस मुलाकात के बारे में पूछा तो उन्होंने बताने से टालते हुए इसे व्यक्तिगत भेंट बताया. जिस पर पर्सनल मामलों की चर्चा की गई. लेकिन पार्टी के नेताओं को ये बात पच नहीं रही थी कि मनियामई की मौजूदगी में कौन सी पर्सनल बात की गई है. लेकिन ये चर्चाएं थम नहीं रही थीं.

आखिरकार 19 जून 1949 को पेरियार ने अपने अखबार विदुतलाई में एक बयान दिया, मेरे खराब स्वास्थ्य को देखते हुए मैं संगठन को किसी सक्षम शख्स को सौंपना चाहता था लेकिन अब तक मुझे ऐसा कोई नहीं मिला. इसलिए अब मैने एक उत्तराधिकारी नियुक्त करने का फैसला किया है. जो पार्टी के मामलों को देखेगा और मुझसे जुड़े ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज पर नियंत्रण रखेगा. इसी बात पर चर्चा के लिए मैं राजाजी से मिला था. उनकी पार्टी अवाक थी कि कुछ दिनों पहले तक वह अगर अन्नादुरई को पार्टी की कमान सौंपने को राजी हो गए थे तो अब उन्हें क्या हो गया है. हर तरफ से पेरियार की आलोचनाएं शुरू हो गईं.

मनियामई से दूसरी शादी का ऐलान
इसी बीच 28 जून को उन्होंने अपने अखबार में एक और बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों से मनियामई उनकी देखरेख कर रही हैं. वह द्रविड़ कषगम के आदर्शों के प्रति भी समर्पित हैं. इसलिए मैने फैसला लिया कि मैं मनियामई के साथ विवाह के गठबंधन में बंध जाऊं ताकि ट्रस्ट और व्यक्तिगत संपत्ति का अधिकार उन्हें सौंप सकूं और साथ ही उन्होंने द्रविड़ कषगम का चेयरमैन का दायित्व सौंप सकूं. वही उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत उत्तराधिकारी होंगी.

इसी बीच तमिलनाडु के एक अखबार ने ये जानकारी दी कि किस तरह से पेरियार की ओर से शादी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन पहले ही भेजा जा चुका है.

शादी की खबर से भूचाल, हरओर विरोध
इसके बाद तो भूचाल ही आ गया. विरोध और आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया. जिधर से देखों उधर से हर स्तर पर बयान जारी करके पेरियार से कहा जाने लगा कि वो ये शादी नहीं करें, ये कतई ठीक नहीं होगी. टेलीग्राम और टेलीफोन पर उन्हें रोकने के लिए संदेशों की भरमार लग गई. हर ओर से शादी नहीं करने की अपील की जाने लगी. डीके के सीनियर नेता और पेरियार के अखबार के मैनेजर ईवीके संपत ने इस्तीफा दे दिया. वह पेरियार के भतीजे थे. उनके बड़े भाई के बेटे. नजदीकी पारिवारिक सदस्य काफी दुखी और क्षुब्ध थे. सभी को लग रहा था कि मनियामई ने बहुत चालाकी के साथ उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है. अब वो वही कर रहे हैं, जो वो चाहते हैं. अन्नादुरई ने पेरियार के आदर्शों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह वह अपने से 40 छोटी युवती से शादी कर रहे हैं, उससे वो अपने ही उसूलों को तोड़ रहे हैं.

पार्टी ने शादी के खिलाफ प्रस्ताव पास किया
इसी बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पेरियार से मनाने गया कि वो शादी का इरादा त्याग दें. वह टस से मस नहीं हुए. फिर दूसरा प्रतिनिधिमंडल भी गया. इस बार उन्होंने सख्ती से उनकी मांग को खारिज कर दिया. फिर 10 जुलाई 1949 को पार्टी की प्रशासकीय समिति ने शादी नहीं करने के खिलाफ प्रस्ताव पास किया. लेकिन इसी दौरान खबर आई की शादी तो हो गई हैं. इसके बाद तो पार्टी में घटनाक्रम और तेज हो गया. अन्नादुरई ने द्रविड़ मुनैत्र कषगम (डीएमके) के नाम से नई पार्टी बना ली. डीके के करीब करीब सभी बड़े नेता और कैडर के लोग उसमें चले गए. यहीं से पेरियार का पराभव और असर भी शुरू हो गया. जहां अगले चुनावों में अन्नादुरई की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं पेरियार की द्रमुक कषगम उससे पीछे ही रही. हालात ये हो गई कि डीके के बचे खुचे कार्यकर्ता भी पार्टी छोड़कर डीएमके और कांग्रेस में जाने लगे.

मनियामई तब चर्चाओं में आईं
पेरियार शादी के बाद 24 सालों तक जिंदा रहे लेकिन पार्टी का कामकाज और दौरों में उनकी मौजूदगी कम होती गई. मनियामई ने पार्टी को मजबूत करने का काम किया लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाईं. हालांकि सामाजिक सुधार के क्षेत्र में मनियामई की अगुवाई में पेरियार ट्रस्ट ने बढिया काम किया. कई स्कूल और अस्पताल खोले गए.

मनियामई के करीबी उन्हें साधारण तरीके से रहने वाली महिला बताते हैं. हालांकि वो 1974 में तब देशभर में चर्चाओं में आईं जबकि दिल्ली में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया. साथ में रावणलीला का आयोजन करते हुए राम, लक्ष्मण और सीता के पुतले जलाए. आपातकाल का खुलकर विरोध किया लेकिन इसके बावजूद डीके कभी तमिलनाडु की राजनीति में वो ताकत नहीं बन सकी, जो दर्जा अन्नादुरई की डीएमके को हासिल हुआ.

निधन
पेरियार का निधन 24 दिसंबर 1973 में 94 साल की उम्र में हुआ. इसके करीब चार साल बाद 16 मार्च 1978 में मनियामई का भी निधन हो गया.

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