समाधि स्थल के लिए भटक रहा गोस्वामी समाज, घर के आंगन में लगाई मृत परिजन की समाधि


फ़िरोज़ खान,राजस्थान (बारां) N.I.T. :- सनातन धर्म के प्रचारक और रक्षक गुसाईं समाज की लोगों की मृत्यु हो जाने के बाद उन्हें जलाने के लिए श्मशान घाट की आवश्यकता नहीं पड़ती है गुस्साई समाज के लोगों को परंपरा से चली आ रही रीति रिवाज के अनुसार जमीन के अंदर समाधि लगाकर बिठाया जाता है इसके लिए लोगों के पास जगह नहीं होने के कारण गोसाई समाज के लोगों की मृत्यु के बाद उनके परिजन अपने घरों में ही उनकी समाधि लगाते हैं ऐसा ही मामला केलवाड़ा कस्बे के दांता ग्राम पंचायत में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति की रविवार को मृत्यु होने के बाद अर्थात शिवलोक गमन के बाद उनके परिजनों ने अपने घर के अंदर ही समाधि लगाई गोस्वामी समाज के लोगों को मुक्तिधाम में अपने ही अंतिम संस्कार के दौरान निभाने वाली रस्मों को पूरा करने और समाधि स्थल की भूमि के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है

इस प्रकार लगाई जाती है समाधि-

दशनाम गोस्वामी को अपने मंदिर और मठ पर पहले समाधि बनाई जाती थी। समाधि संस्कार के बहुत ही नियम है जिनका पालन करना अति आवश्यक है जब दशनाम गोस्वामी समाज का कोई भी व्यक्ति अंतिम पड़ाव पर होता है तो उसे गायत्री मंत्र और गीता पाठ सुनाया जाता है प्राण त्यागने के पश्चात उत्तर दिशा में मुंह करके स्नान आदि और मंत्रोचार क्रियाविधि से नए वस्त्र धारण करवाए जाते हैं फिर डोली बनाकर उस में बिठाकर बाहर ले जाया जाता है मिट्टी वाली जमीन के पास जाकर जमीन में 52 अंगुल का गड्ढा मंत्रोचार से खोदा जाता है मृत व्यक्ति को उसमें उत्तर दिशा में मुख करके कमलासन में बिठा दिया जाता है फिर राम रस अर्थात नमक डालने का मंत्र मिट्टी डालने का मंत्र आदि मंत्रोच्चार क्रिया के बाद राम रस मिट्टी से पूर्ण तरह ढक दिया जाता है सामाजिक क्रिया को मंत्र के साथ समाधि को पूर्ण किया जाता है इसके बाद स्त्री – पुरुष होने अनुसार ही पार्वती और शिव की मूर्ति स्थापना की जाती है

कई बार ज्ञापन देकर लगाई गुहार-

गोस्वामी समाज समिति के जिला अध्यक्ष अशोक गोस्वामी, धर्मेंद्र गोस्वामी ने बताया की क्षेत्र में लगने वाले हर सरकारी शिविरों में अधिकारियों को लिखित में ज्ञापन दे चुके हैं और कार्यालय पर जाकर भी अधिकारियों से कई बार भूमि आवंटन के लिए लिखित पत्र दे चुके हैं आज भी अधिकारी लोग अपने-अपने तथ्यों से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कोई सुनवाई नहीं

अपने घर में दी समाधि –

केलवाड़ा कस्बे में समाधि स्थल की भूमि ना होना एक बहुत बड़ी समस्या है समाज इस समस्या से जूझ रहा है रविवार को ही एक बुजुर्ग व्यक्ति की समाधि समाज के लोगो को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से निराश होकर उसके ही आवास पर लगानी पड़ी जो की बस्ती में स्थित है अगर समाधि स्थल के लिए सरकार द्वारा भूमि आवंटित की गई होती तो उस बुजुर्ग की समाधि उसके घर के अंदर नहीं देनी पड़ती कस्बे में करीब 35 से अधिक गुसाई समाज के परिवार निवास करते हैं जिनको
अपने परिजनों की मृत्यु के बाद समाधि के लिए विकराल समस्या बनी हुई है इस समस्या को लेकर क्षेत्र सहित सभी गांव में रहने वाले लोगों ने सरकार और अधिकारियों के प्रति विरोध जताया

कस्बे में समाधि स्थल नहीं होने के कारण मैंने रविवार को अपने पिता की मृत्यु के बाद उनकी समाधि घर के आंगन में ही लगा दी प्रशासन से लंबे समय से समाज के लोगों द्वारा भूमि आवंटन की मांग चल रही है लेकिन प्रशासन का समाज के प्रति कोई ध्यान नहीं है

वर्जन- नित्यानंद गॉस्वामी मृतक का पुत्र

दशनाम गोस्वामी सभा समिति बारां द्वारा कई बार प्रशासन को समाधि स्थल के लिए भूमि आवंटन करने के लिए ज्ञापन दिए जा चुके हैं लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है

वर्जन- जिला अध्यक्ष दशनाम गोस्वामी समाज सभा समिति बारां

समाधि स्थल की भूमि को लेकर स्थानीय ग्राम पंचायत को समाधि के लिए भूमि आवंटित करनी चाहिए।

वर्जन – पदम गॉस्वामी जिला मीडिया प्रभारी गोस्वामी समाज।

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