सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ़ौरन रिहा करो

सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ़ौरन रिहा करो!
हम अनेक राज्यों में मानव-अधिकार रक्षकों के सुनियोजित दमन और प्रताड़ना की कड़ी निंदा करते हैं और उनकी तुरंत रिहाई की माँग करते हैं!

नई दिल्ली/राजस्थान, N.I.T. : मज़दूर किसान शक्ति संगठन (राजस्थान) सुधा भारद्वाज (छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ वक़ील और वर्तमान में दिल्ली के राष्ट्रीय विधि संस्थान में शिक्षिका), गौतम नवलखा (PUDR के पूर्व अध्यक्ष और पत्रकार), आनंद तेलतंबड़े (मानवाधिकार एवं दलित कार्यकर्ता, प्रबंधन विशेषज्ञ, लेखक एवं राजनैतिक विश्लेषक), फ़ादर स्टेन स्वामी (राँची के 80 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता), वरावर राव (77 वर्षीय कवि एवं जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता), और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फ़रेरा एवं सुज़ैन अब्राहम पर लगाए बेबुनियाद आरोपों और उनकी गिरफ़्तारी/दबिश की कठोर निंदा करता है।

ज्ञातव्य है कि 27 और 28 अग़स्त को पुणे पुलिस ने जगह-जगह छापेमारी के बाद इन कार्यकर्ताओं पर गम्भीर आरोप लगाकर उन्हें भीमा कोरेगाँव में हुई हिंसा के लिए दोषी ठहराया है जबकि इस मामले में हिंदुत्व-वादी नेता सम्भाजी राव भिड़े और उनके साथियों की हिंसा भड़काने में भूमिका को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। कुछ ही महीनों पहले, सुरेन्द्र गाडलिंग (महाराष्ट्र के ट्रेड यूनीयन और मानवाधिकार मामलों के वक़ील), रोना विल्सन (शिक्षिका और राजनैतिक बंदियों को बचाने के लिए बनी समिति की सदस्या), प्रोफ़ेसर शोमा सेन (नागपुर विश्वविद्यालय), सुधीर धवाले (प्रकाशक एवं सामाजिक कार्यकर्ता) और महेश राउत (सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व ‘प्रधान मंत्री ग्रामीण विकास फ़ेलो’) को भी इसी तरह भीमा कोरेगाँव मामले में दोषी बताते हुए गिरफ़्तार कर लिया गया था। अभी तक ये सारी गिरफ़्तारियाँ बेबुनियाद आरोपों के आधार पर की गयी हैं जो दिखाता है कि जो लोग संवैधानिक हक़ों के छीने जाने या क़ानून के ग़लत इस्तेमाल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का साहस या बौद्धिक क्षमता रखते हैं उन्हें जान-बूझकर निशाना बनाया जा रहा है। ये सभी लोग जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता, शिक्षक और चिंतक हैं जो बहुसंख्यक-वादी कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई जा रही हिंसा के ख़िलाफ़ पूरी ताक़त से खड़े हुए हैं। जब पुलिस के पास इन लोगों के ख़िलाफ़ कोई विश्वसनीय सबूत ही नहीं हैं तो इनकी गिरफ़्तारी और प्रताड़ना सीधे इस बात का संकेत देती है कि जिन भी लोगों ने सत्ताधारी दल के ख़िलाफ़ सवाल खड़े किए या उनकी आलोचना की उन्हें राजनैतिक षड्यंत्र के तहत फँसाया गया है।

हम भाजपा के नेताओं और मीडिया के कुछ लोगों द्वारा ‘शहरी नक्सल’ जैसे शब्दों के ग़लत इस्तेमाल से लोगों को गुमराह करने और सरकार में बैठे लोगों के साथ मिलकर एक ‘मीडिया ट्रायल’ जैसी स्थिति बनाने की भी कड़ी निंदा करते हैं। इस सुनियोजित ‘मीडिया ट्रायल’ के ज़रिए ग़रीबों और वंचितों के लिए काम करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ पूर्वाग्रह और दुर्भावना फैलाने की कोशिश की जा रही है।

हमें तो भारत की आज़ादी के संघर्ष के समय से ही चली रही जन-पक्षधर शैक्षिक और बौद्धिक धरोहर पर फ़क़्र है और हम उन सभी लोगों को प्रशंसा का पात्र मानते हैं जो बिना डरे हाशिए पर धकेले गए लोगों के पक्ष में अपने विचार व्यक्त करते आए हैं। इन लोगों की वजह से हिंसा और भेदभाव झेल रहे लोगों को बहुत मदद मिली है। इन लोगों ने अहिंसक तरीक़ों और क़ानून और संविधान के दायरे में काम करते हुए ग़रीब और हाशिए पर धकेले लोगों के लिए काम किया है चाहे इसकी जो भी क़ीमत इन्हें स्वयं चुकानी पड़ी हो। इन लोगों को इस तरह प्रताड़ित करना अन्याय, शोषण और दमन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोगों को रोकने की एक नापाक़ कोशिश है। यह एक शुरुआत है ऐसा माहौल बनाने की जिसमें प्रतिरोध और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की सभी जगहों को ख़त्म कर दिया जाए और संविधान पर मँडरा रहे ख़तरों को भी चुनौती ना दी जाए। भारत के अवाम को यह समझना होगा कि कौन-सी ताक़तें वाक़ई भारत के संविधान और उसके मूल्यों को नेस्तनाबूद करने पर आमादा हैं।

मुल्क़ के सभी नागरिकों का फ़र्ज़ है कि बे-आवाज़ लोगों की आवाज़ को उठाने वाले ऐसे लोगों की मदद के लिए वे आगे आएँ। हम माँग करते हैं कि महाराष्ट्र और केंद्र की भाजपा सरकारें अपने संकीर्ण राजनैतिक स्वार्थों के लिए इस तरह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना बंद करें और दमनकारी क़ानूनी हथियारों के इस्तेमाल से इस तरह क़ानून की खिल्ली उड़ाना बंद करे क्यूँकि भारतीय राजनीति को इसके गम्भीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ज़िंदाबाद
अरुणा रॉय, निखिल डे, शंकर सिंह एवं मज़दूर किसान शक्ति संगठन के सभी साथी.

0 Comments

Leave a reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *

*

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

Designed by  New India Times News Network

Nit tv

New India Times न्यूज 24X7 आपको प्रत्येक खबर से 24 घण्टे अपडेट  2014 -15

Log in with your credentials

Forgot your details?

Skip to toolbar