नमस्ते इंग्लैंड : ट्रेलर बद्रीनाथ की दुल्हनिया की याद दिलाता है

मुम्बई, N.I.T. : पंजाबी पृष्ठभूमि वाली प्रेमकथाओं के साथ निर्देशकों को एक सहूलियत रहती है. हरे-भरे खेतों के बैकड्राप में धूम-धड़ाके वाले डांस सीक्वेंस रोमांस को अतिरिक्त भव्यता देते हैं और उसे कुछ ज्यादा सिनेमैटिक बना देते हैं. ‘नमस्ते इंग्लैंड’ का ट्रेलर भी कुछ एेसे ही शुरु होता है. भरपूर लाइटिंग से चमकते-दमकते चेहरे, उड़ता गुलाल और आतिफ असलम की आवाज. ‘नमस्ते इंग्लैंड’ 11 साल पहले आई अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ अभिनीत फिल्म ‘नमस्ते लंदन’ की सीक्वल है.

ट्रेलर से लगता है कि नमस्ते इंग्लैंड में निर्देशक विपुल अमृतशाह ने कहानी में थोड़े फेर-बदल के साथ उन सारी चीजों को री-पैकेज किया है जो नमस्ते लंदन में थीं. लेकिन तीन मिनट का यह ट्रेलर अापको ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ की भी याद दिलाता है, जिसमें महत्वांकाक्षी अालिया भट्ट एयरहोस्टेस बनने के लिए सिंगापुर चली जाती हैं और उनके पीछे-पीछे वरुण धवन भी वहां पहुंच जाते हैं. और ऐसा होते ही आपको नमस्ते इंग्लैंड के दूल्हा-दुल्हन कुछ और कम लगने लगते हैं.

ट्रेलर से नमस्ते इंग्लैंड की कहानी कुछ इस तरह की लगती है: एक पारंपरिक पंजाबी लड़का (अर्जुन कपूर) एक महत्वाकांक्षी लड़की (परिणीति चोपड़ा) के प्यार में पड़ता है. रोमांस और कॉमेडी के तड़के के साथ फिल्म बढ़ती है और दोनों शादी कर लेते हैं. कुछेक दृश्यों में अर्जुन और परिणीति की मौज-मस्ती उन दोनों की फिल्म ‘इश्कजादे’ की याद दिलाती है. लेकिन ‘नमस्ते लंदन’ को जेहन में रखकर ‘नमस्ते इंग्लैंड’ देखने वाले शायद अक्षय कुमार को याद करें. असली कहानी शुरु होती है इन दोनों की शादी के बाद. फिल्म के इस हिस्से में परिणीति को अपने सपने पूरे करने के लिए पंजाब एक छोटी और बंदिशों वाली जगह लगने लगती है.

यहां से नमस्ते इंग्लैंड रोमांटिक कॉमेडी के जॉनर से निकल प्रेम और महत्वाकांक्षा की खींचतान वाले धरातल पर आती लगती है. परिणीति अपने सपनों को पूरा करने लंदन चली जाती हैं और अर्जुन कपूर भी उनके पीछे वहां जाने को तैयार हो जाते हैं – लीगली या अनलीगली कैसे भी. प्यार और सपनों की टकराहट के जरिए फिल्म वैसा ही ड्रामा और इमोशन रचने की कोशिश करती नजर आती है जिसके लिए मुंबइया सिनेमा जाना जाता है.

इस उतार-चढाव भरी प्रेम कहानी में दर्शकों के मनोरंजन के लिए कुछ गाने भी हैं, जिनमें से कुछ सुरीले भी बन पड़े हैं. ‘पहली बार किसी की बीवी का अफेयर किसी आदमी के साथ नहीं, किसी शहर के साथ देखा है’ जैसे डॉयलॉग कुछ फ्रेश लगते हैं, लेकिन इन्हें ठीक से बुलवाने का सलीका फिल्म में नजर नहीं आता. कई भावनात्मकों दृश्यों मेंं अर्जुन और परिणीति के संवाद हद दर्जे की सपाटबयानी लगते हैं.

अंत में नमस्ते इंग्लैंड बॉलीवुड की उन प्रेम कथाओं जैसी लगती है जिनमें प्रेमी-प्रेमिका अपने-अपने तरीके से अपनी मान्यताओं और मूल्यों के लिए लड़ते हैं लेकिन जीत अंत में प्रेम की होती है. बॉलीवु़ड में इस तरह की प्रेम कहानियां को कहने के सैंकड़ों परंपरागत तरीके हैं, नमस्ते इंग्लैंड इसे कितने अलग ढंग से कहती है यह 19 अक्टूबर को फिल्म की रिलीज के साथ ही पता चलेगा.

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