पीरियड्स में घबराएं नहीं, रखें इन बातों का ध्यान, ‘हैल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम’ ने छात्राओं व महिलाओ को किया जागरूक

सलमान गांधी, सोहना/गुरुग्राम, N.I.T. : बेटी चाहे कितनी भी बड़ी हो जाए लेकिन मां के लिए वह हमेशा उसके जिगर का टुकड़ा ही रहती है। यही कारण है कि बेटियां अपनी हर परेशानी को लेकर मां के पास जाती हैं। अपने पहले पीरियड के दौरान भी वे अपनी मां से ही सलाह लेती हैं। तो ग्रामीण क्षेत्र में शर्माजाती है, यह शर्माने वाला विषय नही हैं। लेकिन जानकारी या जागरुकता के अभाव में असुविधाजनक तरीके अपनाती हैं। इस वजह से कई बार बेटियों को संक्रामक रोग होने का खतरा बना रहता है।

‘फार्मेसी वीक’ पर ‘एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी’ के स्कूल ऑफ़ फार्मेसी  ‘डीन डॉ. अनुपमा दीवान’ की अध्यक्षता में ‘हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम’ का आयोजन मेवात के खलीलपुर खेड़ा गाँव के ‘गवर्नमेंट हाईस्कूल खेड़ा-खलीलपुर’ में किया गया। स्कूल की छात्राओ और उनकी माताओं-महिलाओं ने प्रोग्राम में भाग लिया। इस प्रोग्राम को स्कूल ऑफ़ फार्मेसी से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रानी मंसूरी, असिस्टेंट प्रोफेसर अमीशा व्याष, असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज शर्मा, एएसयू ड्रामा टीम(थेस्पियन टीम), एम.फार्ममा, बी.फार्मा, डी. फार्मा और जनरल वर्कर ओमवीर सिंह ने सफल बनाया।

स्कूल ऑफ फार्मेसी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रानी मंसूरी ने पीडियड्स से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीरियड्स सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, इसमें डरने की जरूरत नहीं। उन्हों ने छात्राओ व महिलाओं को इस दौरान संक्रमण से बचने के लिए कपड़े के बजाय पैड के इस्तेमाल की सलाह दी। वीडियो के जरिए व दिखाकर पेड के इस्तेमाल के सही तरीके भी समझाए और इसके फायदे भी बताए। इससे होने वाली महिला रोग बताया कि किशोरावस्था में बहुत से शारीरिक परिवर्तन होते हैं। पीरियड्स भी सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। इसमें खानपान का ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान चिड़चिड़ापन और पेट दर्द की शिकायत रह सकती है। इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

पेड क्या है और इसका कैसे इस्तेमाल करें ?

“पेड” का अर्थ है एक ऐसा सोखने वाला पेड जिसे आप अपने मासिक धर्म के दौरान मासिक धर्म के रक्त को सोखने के लिए अपनी पैंटी के अंदर पहनती हैं। आपके मासिक स्राव और पसंद के आधार पर, एक उचित मोटाई, लंबाई और अवशोषण क्षमता वाले पेड को चुनें।

डॉ. रानी मंसूरी ने सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करने का आसान तरीका बताया, वह निम्न ये हैः

  • पेड के पीछे के कागज़ को हटाएँ और पेड को अपनी पैंटी में रखें.
  • विंग्स पर से कागज़़ हटाएँ। पैंटी के दोनों ओर विंग्स को लपेटें और उसे ज़ोर से दबाएँ.
  • पेड को कचरे के डिब्बे में फेंकने से पहले उसे कागज़़ में लपेटें.
  • पेड को शौचालय में न डालें क्योंकि इससे पेड नाली में फस जायेगा

याद रखें, आपके आराम के लिए और दुर्गंध से बचने के लिए आप केवल एक काम कर सकती हैं और वह है अपने पेड को प्रत्येक कुछ घंटों में बदलना।

मासिक धर्म के दौरान कैसा महसूस होगा ?

एक बार आपको अपने सामान्य पीएमएस लक्षण पता चल जाएँ, तो आप इस समय स्वयं का बेहतर इलाज करने में सक्षम होंगी। यहाँ कुछ आम लक्षण दिए गए हैं:

  • मुँहासे
  • सूजन
  • वजन बढ़ना
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • सिरदर्द/पीठ दर्द
  • खाने की तीव्र इच्छा/अधिक खाना
  • थकान
  • रूलाई आना
  • चिड़चिड़ापन
  • बैचेनी
  • मूड परिवर्तन (मूड स्विंग)/या अवसाद (डिप्रैशन)

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका आहार आपको इन असुविधाओं के प्रभाव को समाप्त या कम करने में मदद कर सकता है?

अपना पेड कितनी बार बदलना चाहिए ?

सभी बातों की तरह, यह कई बातों पर निर्भर करता है। आपकी जानकारी के लिए हालांकि आपको लगता है कि मासिक धर्म के दौरान आपका काफी खून प्रवाहित होता है, लेकिन एक औसत मासिक धर्म के दौरान अधिकांश लड़कियों का आमतौर पर 4 से 12 छोटे चम्मच खून प्रवाहित होता है, जो वास्तव में ज़्यादा नहीं है।

आप अपने पेड को प्रत्येक 4 घंटों में बदल सकती हैं, लेकिन अपने मासिक धर्म की शुरूआत में, आपको अधिक रक्त प्रवाह हो सकता है और आपको प्रत्येक 2 से 3 घंटों में पेड बदलना पड़ सकता है।

अपने मासिक धर्म के दौरान रक्त प्रवाह की तीव्रता की आदत पड़ने पर आपको अपने पेड को बदलने की आवृत्ति की आदत पड़ जाएगी।

पीरियड्स में कौन से योगा करें ?

1- मार्जरि आसन

  •  घुटने के बल बैठें। हथेलियां जमीन पर रखें।
  • गहरी सांस लें। गर्दन ऊपर उठाएं, कमर नीची रखें।
  • सांस छोड़ते हुए गर्दन नीचे लाएं और पीठ ऊंची करें।

2- पर्वतासन

  • पद्मासन की मुद्रा में बैठें। दायां पैर बाईं और बायां पैर दाईं जांघ पर हो।
  • सांस खींचते हुए दोनों हाथों को जोड़कर ऊपर उठाएं।
  • कुछ देर रुके रहें। सांस छोड़ते हुए हाथ नीचे ले आएं। इसे कई बार दोहराएं।

3- बद्ध कोणासन

  • पालथी मारकर बैठें। पैरों के पंजों को आपस में जोड़ें।
  • घुटनों और जांघों को जमीन पर सटाकर रखें।
  • गहरी सांस लेते हुए कुछ देर पोजिशन मेंटेन करें।

4- कटिचक्रासन

  •  सीधे खड़े हों। हाथों को आपने सामने की ओर ऊपर उठाएं।
  •  सांस छोड़ते हुए कमर दाएं घुमाएं। सांस लेते हुए वापस लौटें।
  •  सांस छोड़ते हुए अब बाएं घूमें। इस तरह कई बार दोहराएं।

5- वज्रासन

  • घुटनों के बल बैठें। एड़ियों को नितंब के नीचे रखें।
    हथेलियों को घुटनों पर रखें।
  • गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें
    कुछ देर इस पोजिशन को मेंटेन करें।
  • पीरियड्स के दौरान करें प्राणायाम भ्रामरी प्राणायाम
    सुखासन में बैठें।
  • अंगूठों से कान और बीच की उंगलियों से आंखें बंद करें।

पीरियड्स पर रखे खाने का ध्यान

पीएमएस (मासिक पूर्व सिंड्रोम) के लक्षण ध्यान भंग कर सकते हैं, कष्टप्रद और दर्द भरे हो सकते हैं। लेकिन सौभाग्य से इसे कम करने के लिए आप ऐसी कुछ उपाय कर सकती हैं, जैसे विशेष रूप से मासिक धर्म से पहले और उसके दौरान आपके खाने के तरीके से शुरू करना।

हरी पत्तेदार सब्जियाँ

  • वे आयरन और विटामिन बी से भरपूर हैं, साथ ही उनमें मौजूद फाइबर की अधिक मात्रा भी पाचन समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकती है।

नट्स (अखरोट वगैरह)

  • अच्छे फैट या ओमेगा-3 से भरपूर भोजन शरीर को अच्छा रखते हैं और चिप्स की तुलना में पेट अच्छी तरह भरते हैं।

साबुत अनाज

  • अपने मासिक धर्म के दौरान सामान्य् रहने में मदद करने हेतु फाइबर एक अन्य तरीका है – साथ ही जब आपको पर्याप्त फाइबर मिलता है, तो यह सूजन (पीएमएस का अन्य लक्षण) का मुकाबला करने में सहायता करता है।

रेड मीट

  • मासिक धर्म के दौरान आयरन वाली चीजों के सेवन में वृद्धि से प्रत्येक महीने होने वाले आयरन के नुकसान की भरपाई की जा सकती है।

ताज़े फल

  • अपने पाचन तंत्र को ठीक करने और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाने का एक अन्य बढ़िया तरीका है एंटीऑक्सीडेंट्स।

‘एएसयू ड्रामा टीम(थेस्पियन टीम)’ ने नुक्कड़ नाटक कर के छात्राओं व महिलाओं को जागरूक किया। प्रोग्राम के अंत मे स्कूल ऑफ फार्मेसी ने स्कूल की छात्राओं और महिलाओं को पेड और स्नैक्स डिस्ट्रीब्यूशन किया। खलीलपुर खेड़ा के सरपंच – संतलाल खटाना, स्कूल के प्रिंसिपल धर्मवीर, कविता ग्राम पंचायत मेम्बर, पंडित योगेश, डॉ. जेपी चौहान को सम्मानित किया गया।

गाँव की जयमाला, सुमिता, विमला, चंद्रावती, आरती, राजकली, चमेली, वीरवती ने प्रोग्राम में बढ़ चढ़कर भाग लिया। उन्होंने कहा हमे बहुत कुछ सीखने को मिला।

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