राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक सुब्रत त्रिपाठी मानते हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस से अब सड़ांध आने लगी है और इसका कारण है पुलिसकर्मियों को खुला राजनीतिक संरक्षण. उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस को अब नागरिक पुलिस नहीं बल्कि राजनीतिक पुलिस कहना ज्यादा सही होगा. राज्य के मौजूदा पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह ने स्वयं मुरादाबाद में डाॅ. भीमराव अम्बेडकर पुलिस अकादमी में प्रशिक्षु आईपीएस और पीपीसएस अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए इस बात को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा, ‘30 साल पहले जब मुझे यूपी काडर आवंटित हुआ था तो वह मेरे लिए गर्व की बात थी क्योंकि उस समय यूपी पुलिस की छवि बहुत अच्छी थी, लेकिन बाद के दिनों में पुलिस की छवि में गिरावट आती गई है.’

योगी सरकार के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि विपक्षी राजनीतिक दल अपनी-अपनी उलझनों में इस तरह फंसे हुए हैं कि उन्हें कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाने की फुरसत ही नहीं है. लेकिन अगर राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की और अभूतपूर्व कदम नहीं उठाए तो यह तय है कि लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के तमाम कार्यों के बावजूद भाजपा को जनता का गुस्सा झेलना ही पड़ेगा. राज्य में पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए अब ढेर सारे तबादले एक साथ कर देने से काम चलने वाला नहीं. राज्य की जनता पुलिस को वाकई ‘मित्र’ की भूमिका में देखना चाहती है और इसके लिए पहल राजनीतिक नेतृत्व को ही करनी होगी.