2019 में क्या योगी सरकार पूरे करेगी वो काम, जो अखिलेश सरकार ने किये थे शुरू

रणविजय सिंह, आजमगढ़. वर्ष 2017 के चुनाव में यूपी की सत्ता बदली। देश और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार हो गयी। उम्मीद थी कि वर्ष 2018 जिले के लिए खास होगा। कारण कि वर्षो बाद ऐसा हुआ था कि केंद्र और राज्य की सरकारें एक ही पार्टी की है। पूर्वांचल के कई जिलों में इसका असर भी दिखा लेकिन वर्ष 2018 में आजमगढ़ के लोगों की तमाम हसरतें अधूरी रह गयी। अब इसकी वजह बड़ी लहर के बाद भी जिले में सत्ता धारी दल की बड़ी हार हो या कुछ लेकिन लोग काफी निराश है और उम्मीद जता रहे है कि चुनावी साल में शायद उनकी कुछ हसरते पूरी हो जाय।

 

भाजपा के यूपी की सत्ता में आने के बाद सिर्फ एक बड़ी घोषणा हुई मंदुरी हवाई पट्टी को एअरपोर्ट में बदलकर विभिन्न महानगरों के लिए उड़ान शुरू करने की लेकिन यह हसरत अभी अधूरी है। माना जा रहा है कि अप्रैल या मई तक रनवे का विस्तारीकरण पूरा कर उड़ान शुरू की जायेगी। इस योजना से लोगों को काफी उम्मीद है कारण कि यातायात के ममाले में यह जिला पड़ोस के छोटे जिलों से भी काफी पीछे है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। भाजपा के पदाधिकारी से लेकर डिप्टी सीएम तक आश्वासन दे चुके है। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने तो यहां तक कहा है कि निजी क्षेत्र से प्रस्ताव मांगे गए है लेकिन जिले के लोगों को उम्मीद है कि सरकार चुनावी साल में सरकारी विश्वविद्यालय की घोषणा यहां के लिए करेगी।

 

इसके अवाला अखिलेश सरकार की कई योजनाओं को सरकार दो साल में पूरा नहीं करा सकी है। जैसे सिधारी रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण, हरिऔध कला भवन और शाही पुल पर नए पुल का निर्माण अब तक पूरा नहीं है। काम की गति काफी धीमी है। लोग उम्मीद लगाए बैठे है कि यह कार्य चुनाव से पहले पूरा होगा। कारण कि बीजेपी सरकार के पास इन योजनाओं को छोड़ दे तो चुनाव में उज्ज्वला, पीएम आवास, सौभाग्य और आयुष्मान के अलावा गिनाने के लिए कोई खास योजना नहीं है। यह योजनाएं भी केंद्र सरकार की है। यूपी सरकार ने एक एअरपोर्ट के अलावा कोई योजना अब तक नहीं दी है।

 

वैसे चुनाव के बाद से ही यहां के लोगों को उपेक्षा का खतरा था। जनपद को सपा-बसपा का गढ़ कहा जाता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी यह बात स्पष्ट हो गई जब मोदी लहर में भी जनपद में सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में आई। वह भी इसलिए कि फूलपुर सीट से बाहुबली रमाकांत के पुत्र अरूणकांत मैदान में थे और उन्होंने बेटे के लिए पूरी ताकत लगा दी थी।

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बाकी की नौ सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। जबकि बीजेपी गठबंधन ने यूपी में 325 सीटे हासिल की थी। फिर भी उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद के मध्य का जिला होने के कारण सरकार इसपर ध्यान देगी। कारण कि उसे यहां अपनी स्थिति भी मजबूत करनी है लेकिन सरकार ने सभी वर्गों को निराश किया।

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बजट के आभाव में सपा सरकार में संचालित जो योजनाएं लटकी थी उसे भी सरकार पूरा नहीं करा सकी है। वैसे सरकार ने इसके लिए बजट दे दिया है लेकिन काम की गति इतनी धीमी क्यों है कोई पूछने वाला नहीं है। चुंकि अब े 2019 का चुनाव समाने है तो लोगों को उम्मीद है कि सरकार इन पर ध्यान देगी।

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