आज ही विश्व हिन्दी दिवस मनाने की हुई थी घोषणा

“भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी[2]। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।”

नई दिल्ली, N.I.T. : विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं।

आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और सभ्यता-संस्कृति की दृष्टि से सबसे पुराना देश भारत अंग्रेज़ों के चले जाने के बाद भी उनकी दी हुई अंग्रेजी की बड़े गर्व से गुलामी बजा रहा है. उसने सरकारी कामकाज की भाषा बना कर उसे सर्वोच्च सिंहासन पर बिठा रखा है. यहां तक कि भारत का संविधान भी मूल रूप से अंग्रेजी में ही लिखा गया है. विवाद की स्थिति में अंग्रेज़़ी शब्दावली को ही वैध माना जायेगा, हिंदी अनुवाद को नहीं.

संविधान में कहा गया था कि 1965 में अंग्रेज़ी का स्थान हिंदी ले लेगी. तमिलनाडु के कट्टर हिंदी-विरोधियों की कृपा से सरकारी कामकाज आज तक न केवल मूलतः अंग्रेज़़ी में ही हो रहा है. स्वयं हिंदीभाषियों के बीच भी – या तो हीनताग्रंथि के कारण या फिर शेखी बघारने के जोश में – अपना निजी कामकाज भी यथासंभव अंग्रेज़़ी में ही करने की प्रवृत्ति हावी हो गयी है. लोगों के लेटरपैड, विज़िटिंग (परिचय) कार्ड, शादी-ब्याह के निमंत्रणपत्र, दुकानों-कार्यालयों के नामपट्ट और सामान बेचने-ख़रीदने की रसीदें तक, बिना किसी अनिवार्यता के, अंग्रेज़ी में ही लिखने का रिवाज़ बनता गया है.

टुटपुंजिए माता-पिता भी अपने बच्चों को बड़े शौक से अंग्रेज़़ी माध्यम के स्कूलों में भेज रहे हैं. हिंदी लिखने-पढ़ने-बोलने में जिन्हें जितनी शर्म आती है, वे उतने ही ऊंचे स्वर में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने का नारा लगाते हैं. ख़ुद तो हिंदी को हेठी समझते हैं और चाहते हैं कि सारी दुनिया हिंदी सीखे!

जो देश आज़ादी के सात दशक बाद भी अंग्रेज़ी के मोहजाल में इस तरह फंसा हो कि उसकी अपनी ही सबसे बड़ी भाषा का कथित स्वतंत्र मीडिया भी, वाक्यरचना के समय सहज-स्वाभाविक देशज शब्दों को हटा कर अंग्रेज़ी के शब्द ठूंसने लगे, तो फ़िर विदेशी, बैसाखियों के सहारे चलने वाली एक ऐसी आधी-अधूरी लंगड़ी भाषा सीखने में समय व संसाधन बर्बाद क्यों करें? वे अंग्रेज़ी के अपने अधूरे या पूरे ज्ञान से ही काम चलाने की क्यों न सोचें? कम से कम यूरोपीय तो यही सोचते हैं और प्रायः पूछते भी हैं कि भारतीयों में अपनी भाषा से लगाव और आत्मसम्मान की इतनी कमी क्यों होती है? उन्हें आश्चर्य होता है कि हज़ारों वर्षों की अपनी सभ्यता का दावा करने वाला भारत इन हज़ारों वर्षों में अपनी कोई सर्वमान्य भाषा क्यों नहीं बना पाया? मुझ से जर्मनी में कई बार यही पूछा जाता है.

अंग्रेज़ी के प्रति दास-मानसिकता

अंग्रेज़ी के प्रति भारतीयों की दास-मानसिकता और हिंदी को लेकर हीन-भावना के दो उदाहरण इस संदर्भ में अनुचित न होंगे. बात 1990 वाले दशक के अंत की है. जर्मन विश्वविद्यालयों में हिंदी के छात्र व्यावहारिक अनुभव पाने के लिए ‘रेडियो डॉएचे वेले’ के हिंदी कार्यक्रम में आया करते थे. मैं उस समय हिंदी विभाग का प्रमुख था. हिंदी की एक ऐसी ही छात्रा ने एक दिन मुझे बताया कि दो भारतीयों ने एक बार उसे इसलिए बुरी तरह से डांट दिया कि उसने उन से हिंदी में बात करने की हिम्मत करली

इतिहास

विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। इसीलिए इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी, 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं।

देश दुनिया के इतिहास में 10 जनवरी की तारीख में दर्ज कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-

1616: ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो ने अजमेर में मुगल बादशाह जहांगीर से मुलाकात की।

1836: प्रोफेसर मधुसूदन गुप्ता ने पहली बार मानव शरीर की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया।

1886: भारत के शिक्षाविद, अर्थशास्त्री एवं न्यायविद् जॉन मथाई का जन्म।

1908: हिन्दी के निबन्धकार और साहित्यकार पद्मनारायण राय का जन्म।

1940: भारतीय पार्श्व गायक और शास्त्रीय संगीतकार के. जे. येसुदास का जन्म।

1946: लंदन में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक में 51 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

1969: प्रसिद्ध राजनेता एवं लेखक सम्पूर्णानंद का निधन।

1972: पाकिस्तान की जेल में नौ महीने से अधिक समय तक कैद रहने के बाद शेख मुजीब-उर-रहमान स्वतंत्र राष्ट्र बने बंगलादेश पहुंचे।

1974: भारतीय अभिनेता ऋतिक रोशन का जन्म।

1975: प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन नागपुर में हुआ।

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