यूपी में सपा-बसपा के फॉर्म्यूले से RLD नाखुश, साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी अजित सिंह को रखा दूर

लखनऊ, N.I.T. : RLD चीफ अजित से जब शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि गठबंधन के साथियों से बातचीत के बाद ही इस पर फैसला होगा।

प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन पर अजित सिंह ने कहा, ‘अभी सीटों पर बातचीत नहीं हुई है। गठबंधन के साथियों से बात करेंगे, जिसके बाद ही कोई फैसला होगा। एसपी-बीएसपी प्रमुख की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुझे जानकारी नहीं है।’
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में कल होने जा रहे महागठबंधन से पहले सियासी हलचल तेज है। समाजवादी पार्टी (एसपी) अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती कल दोपहर एक मंच से इसकी घोषणा करने जा रहे हैं।

इसी बीच गठबंधन के तीसरे संभावित साथी राष्ट्रीय लोकदल RLD ने इस ऐलान से ऐन पहले सीटों का दांव खेल दिया है। माया, अखिलेश के फॉर्म्यूले से नाखुश RLD ने अपने लिए 6 सीटों की शर्त रखी है। RLD के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने कहा है कि उनकी पार्टी प्रदेश की छह सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
अहमद ने कहा कि महागठबंधन के लिए शनिवार को माया-अखिलेश की होने वाली साझा प्रेस कॉन्फ्रेस के लिए पार्टी को न्योता नहीं मिला है। हालांकि उन्होंने बताया कि पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी कल राजधानी लखनऊ में रहेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं से वे बाद में मुलाकात कर सकते हैं। जयंत चौधरी इससे पहले अखिलेश से मंगलवार को उनके कार्यालय में मुलाकात कर चुके हैं।

मायावती RLD को 3 सीटें देने पर अड़ीं!
सूत्रों के मुताबिक मायावती, आरएलडी को तीन सीटों से ज्यादा देने के लिए राजी नहीं हैं जबकि आरएलडी कम से कम छह सीटें चाहती है। गठबंधन के तहत मथुरा, बागपत और मुजफ्फरनगर की सीटें आरएलडी को दी जा सकती हैं लेकिन पार्टी और सीटें चाहती है।
मसूद अहमद ने कहा, ‘पार्टी महागठबंधन का हिस्सा है और पार्टी नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव में छह सीटों की मांग की है। ये सीटें हैं बागपत, मथुरा, मुजफ्फरनगर, हाथरस, अमरोहा और कैराना।’
उन्होंने कहा कि कैराना लोकसभा सीट तो आरएलडी के पास पहले ही है अब पांच सीटों की और मांग की गई है । इस बारे में फैसला पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव तथा बीएसपी सुप्रीमो मायावती के बीच बातचीत के बाद तय होगा।

सोनिया, राहुल को रायबरेली-अमेठी में वॉकओवर!
बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली पर महागठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगा। निषाद पार्टी को भी महागठबंधन में शामिल किया जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने 73 सीटें जीती थीं और इस बार उसके नेता 73 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।

कैराना सीट ने बढ़ाया अजित का हौसला
बीएसपी-एसपी और आरएलडी ने साथ मिलकर उपचुनाव लड़ा था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट और उप मुख्यमंत्री की फूलपुर सीट से एसपी प्रत्याशियों को जीत मिली थी जबकि कैराना सीट पर आरएलडी प्रत्याशी ने बीजेपी से यह सीट छीनी थी। बीएसपी सुप्रीमो मायावती गुरुवार शाम दिल्ली से लखनऊ पहुंची। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह 15 जनवरी को अपने जन्म दिन के दिन महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती हैं लेकिन अब जन्म दिन के तीन दिन पहले ही इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है।
बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को लखनऊ में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों आगामी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। साथ ही इस दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर ऐलान भी संभव है। प्रेस कॉन्फ्रेंस दोपहर 12 बजे लखनऊ के होटेल ताज में होगी, जिसके लिए मीडिया को आमंत्रित किया गया है। यूपी की राजनीति और खासकर एसपी-बीएसपी के लिए शनिवार का दिन बेहद अहम साबित होगा।

ऐसा पहली बार होगा जब यूपी की राजनीति के दो दिग्गज मायावती और अखिलेश यादव साथ-साथ मीडिया से रूबरू होंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस का आमंत्रण एसपी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी और बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की ओर से भेजा गया है। इससे पहले राम मंदिर आंदोलन के दौर में 1993 में एसपी और बीएसपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और बीजेपी को शिकस्त देते हुए राज्य में गठबंधन सरकार बनाई थी। बता दें कि गुरुवार को बीएसपी चीफ मायावती तीन महीने बाद दिल्ली से लखनऊ पहुंची थीं।

माया-अखिलेश ने बनाया है यह फॉर्म्युला!
यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं। माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां 37-37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं। वहीं कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की स्थिति में उन्हें सिर्फ उनकी परंपरागत दो सीटें- अमेठी और रायबरेली दी जाएंगी। आरएलडी के भी इस गठबंधन में शामिल होने की संभावना है, जिसे 3 से 4 सीट दी जा सकती हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अगर अखिलेश और माया गठबंधन करते हैं तो 25 साल पहले का करिश्मा फिर से दोहराया जा सकता है, जब एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम के साथ बीजेपी के रोकने के लिए हाथ मिलाकर यूपी में सरकार बनाई थी। मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव और कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती का यह कदम एक बार फिर से बीजेपी को ही रोकने के लिए है, जिसने साल 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को हाशिये पर धकेल दिया था।

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