ई-टिकट माफिया को आरपीएफ क्राइम ब्रांच ने दबोचा

Aligarh Police

अलीगढ़, N.I.T. : रेलवे की टिकट बुकिंग सुविधा देेने वाली आइआरसीटीसी के पोर्टल पर पांच निजी अकाउंट खोलकर ई-टिकट की बिक्री का आरपीएफ की क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ करते हुए एक शख्स को गिरफ्तार किया है। यह कारोबार कराने वाला सेवानिवृत्त फौजी फरार है। आरोपितों ने करीब तीन साल में 5 लाख 98 हजार 145 रुपए मूल्य के 557 टिकट बेच चुके हैैं। छापेमारी में एजेंट के नाम जारी दो आइडी व सात अग्रिम टिकटों से आए 3660 रुपये मिले हैैं। एजेंट आइडी से कोई टिकट जारी नहीं किया गया है। ये लोग ग्राहक से 100-150 रुपये तक मुनाफा वसूलते थे। आरपीएफ ने खुर्जा जंक्शन थाने में दोनों के खिलाफ टिकटों के अवैध कारोबार की रिपोर्ट दर्ज की है। कोर्ट ने आरोपित को जेल भेज दिया है। पूर्व फौजी की तलाश जारी है।

छह हजार रुपये पर रखा था कर्मचारी

क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार कौशिक के मुताबिक चंडौस कस्बे के डाबर रोड स्थित रामेश्वर दयाल शर्मा के मकान में शर्मा ट्रैवलिंग सर्विसेज के नाम से ऑफिस है। यहां ऑनलाइन रेलवे व हवाई यात्रा के टिकट बनते हैैं। फौज से रिटायर हो चुके रामेश्वर ने नई बस्ती निवासी विकास पुत्र लोकेश अग्रवाल को छह हजार महीने की तनख्वाह पर दफ्तर में रखा हुआ था।

आइआरसीटीसी के पोर्टल पर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन

इंस्पेक्टर के अनुसार आइआरसीटीसी अपने एजेंट को यूजर आइडी देता है, जिसके जरिये वे रेलवे का ई-टिकट जारी कर सकते हैैं। इसमें ग्राहक को 10 से 15 रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। कोई भी शख्स आइआरसीटीसी के पोर्टल पर यात्री के रूप में रजिस्ट्रेशन कर सकता है। इसमें भी यूजर आइडी व पासवर्ड मिलता है। इसके जरिये कोई भी अधिकतम छह टिकट बना सकता है।

निजी यूजर आइडी से हो रहा था व्यवसाय

चंडौस में निजी यूजर आइडी के जरिये व्यवसाय हो रहा था। विकास ने अपने नाम की पांच यूजर आइडी पोर्टल पर बना रखी थीं। इनके जरिये वह टिकट बना रहा था। हर टिकट पर 100 से 150 रुपये अतिरिक्त लेते थे। करीब तीन साल से यह धंधा चोखा चल रहा था। पुलिस को विकास से बेचे गए सात ई-टिकट के बदले आए 3660 रुपये मिले हैैं। कंप्यूटर व संबंधित रजिस्टर भी जब्त किए गए हैैं। एजेंट की मिलीं दो यूजर आइडी की भी छानबीन हो रही है। ये किसके नाम पर हैं, अभी पता नहीं चला है।

अधिकांश परिवारी सदस्य रहते हैैं बाहर

आरोपित पूर्व फौजी रामेश्वर पांच भाई हैैं। दो भाई बीएसएफ में कार्यरत हैं। एक गन्ना विभाग में है और एक निजी कंपनी में। इनके पिता रिटायर्ड शिक्षक हैैं। सभी लोग दिल्ली व अन्य स्थानों पर रहते हैैं। घर पर बने ऑफिस में विकास अग्रवाल काम करता था।

तत्काल की टिकट पर करते थे 300 तक कमाई 

आइआरसीटीसी के पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति पर्सनल यूजर आइडी बनाकर हर महीने अधिकतम छह टिकट बुक कर सकता है। इसका कोई अतिरिक्त चार्ज भी नहीं देना पड़ता। इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार कौशिक के अनुसार इसका लाभ उठाते हुए सामान्य ई-टिकट के साथ तत्काल की टिकट भी बनाई जा रही थीं। तत्काल टिकट के बदले 300 रुपए तक अतिरिक्त लिए जा रहे थे। ऐसा दूसरे कंप्यूटर व साइबर कैफे संचालक निजी आइडी भी कर रहे हैैं। चंडौस में किसी ने मुखबिरी कर दी तो बात थाने-कचहरी तक पहुंच गई। इसमें टिकट असली ही है, पर निजी सुविधा का व्यावसायिक लाभ उठाने का गुनाह हो गया। हैरानी की बात है कि पांच यूजर आइडी से लगातार टिकट बनने के बावजूद कोई पकड़ नहीं पाया। इसकी रेलवे के कमर्शियल विभाग को खबर है, न आरपीएफ को जानकारी। आइआरसीटीसी भी नहीं बता सकती कि टिकट लेने वाला वैध है या अवैध?

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