फर्रुखाबाद में महिला सिपाही ने घर में लगाई फांसी

अब्दुल मुईद खान, फर्रुखाबाद, N.I.T. : फर्रुखाबाद स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला खरिक निवासी महिला सिपाही ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। गाजियाबाद में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उसने 26 जनवरी को ही आगरा में आमद कराई थी। परिजनों ने बताया कि बहनोई की मौत होने के बाद से वह परेशान थी। इसके चलते ही उसने यह कदम उठाया है।

ग्राम पंचायत महोई के मजरा नगला खरिक निवासी लाल बहादुर पाल की 22 वर्षीय बेटी अंजू पाल 11 जुलाई 2018 को आगरा में पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हुई थी। इसके बाद उसकी ट्रेनिंग गाजियाबाद में हुई थी। 26 जनवरी को उसने जनपद आगरा की पुलिस लाइन में आमद कराई थी।

इसी दिन जनपद कन्नौज थाना छिबरामऊ के गांव खुबरियापुर निवासी अंजू के बहनोई अंकित पाल की इटावा में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके चलते अंजू 27 जनवरी को तीन दिन की छुट्टी लेकर घर चली आई थी।

उसी दिन अंजू के पिता लाल बहादुर, मां माया देवी, बड़ा भाई रवि, छोटा भाई राजीव खुबरियापुर चले गए थे। घर में अंजू और उसकी भाभी लीना ऊर्फ पूजा थी। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे लीना छत पर कपड़े डालने चली गई। अंजू नीचे थी। कुछ देर बाद लीना छत से कपड़े डालकर नीचे आई तो उसे अंजू नजर नहीं आई। इस पर उसने आवाज दी पर कमरे से कोई जवाब नहीं आया।

इस पर वह अंदर गई और कमरा देखा तो वह अंदर से बंद था। उसने खिड़की से झांक कर देखा तो अंजू अपने दुपट्टे के फंदे से छत में लगे कुंडे से लटक रही थी। लीना ने बाहर जाकर चीख पुकार मचाई। इससे आसपास के लोग एकत्र हो गए। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई।

उसने दरवाजे की कुंडी तोड़कर शव को बाहर निकाला। सूचना पर माता-पिता व भाई भी पहुंच गए। उन्होंने पुलिस को बताया कि बहनोई अंकित की मौत के बाद से परेशान थी। अंजू को मंगलवार को ही आगरा वापस जाना था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।

इंस्पेक्टर दधिबल तिवारी ने बताया कि पूछताछ में परिजनों ने जानकारी दी है कि बहनोई की मौत से महिला सिपाही काफी परेशान थी। इसके चलते ही उसने आत्महत्या कर ली है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

ट्रेनिंग पर ही वापस नहीं जाना चाहती थी अंजू  
अंजू के फांसी लगाकर जान देने के बाद गांव में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बताया गया कि करीब डेढ़ माह पूर्व अंजू गाजियाबाद से ट्रेनिंग के दौरान घर आई थी। तब वह वापस ट्रेनिंग पर न जाने की बात कह रही थी। उसके पिता ने उसे किसी तरह समझाकर ट्रेनिंग पूरी करने के लिए गाजियाबाद भेजा था। पर यह बात स्पष्ट नहीं हो सकी थी कि वह ट्रेनिंग पर वापस क्यों नहीं जाना चाहती थी। उसने गांव की ही अपनी एक दो सहेलियों को यह बताया था कि वह पुलिस की नौकरी नहीं करना चाहती है।

होनहार बेटी पर परिवार को ही नहीं गांव के लोगों को भी था नाज  
अंजू के पिता लाल बहादुर व बड़े भाई रवि खेती कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। छोटा भाई अभी इंटरमीडिएट में ही पढ़ रहा है। अंजू शुरू से पढ़ाई में तेज थी। उसने दो वर्ष पूर्व मोहम्मदाबाद स्थित कालेज से इंटरमीडिएट पास किया था। इसके बाद वह पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटी थी। वह गांव में ही दौड़ लगाती थी। पुलिस में भर्ती होने के बाद से परिवार के लोग काफी खुश थे। परिवार को नहीं गांव वालों को भी अंजू पर नाज था।

बहन लक्ष्मी को लेकर थी चिंतित  
बहनोई अंकित पाल ट्रक चालक थे। वह 26 जनवरी को दिल्ली से पुरानी कार खरीद कर ला रहे थे। इसी दौरान जनपद इटावा के कर्री पुलिया के पास ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी थी। इससे उनकी मौत हो गई थी। अंकित की पत्नी लक्ष्मी व उसकी दो छोटी-छोटी बेटियों को लेकर अंजू खासी चिंतित थी।

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