Valentine’s day Special पर पढ़िए ख्‍यातिप्राप्‍त कलाकारों की प्रेम कहानी

मुम्बई, N.I.T. : साहिर लुधियानवी से अमृता प्रीतम का प्रेम जग-जाहिर था। अमृता ने साहिर से अपने लगाव को आत्मकथा रसीदी टिकट में भी लिखा है। साहिर और अमृता को करीब से पढ़ने वाले जानते होंगे कि कैसे अमृता साहिर की आधी पी चुकी सिगरेट को फिर सुलगाया करती थीं और साहिर अमृता के चाय के प्याले को संभाल कर रखते थे। लेकिन अमृता और साहिर सामाजिक रूप से कभी एक दूसरे के न हो सके। अमृता ज़िदगी के आख़िर तक इमरोज़ के साथ रहीं थीं। कहते हैं कि जब अमृता इमरोज़ के साथ साहिर से मिलने पहुंची तो साहिर ने एक नज़्म कही थी-
महफ़िल से उठ जाने वालों, तुम लोगों पर क्या इल्ज़ाम
तुम आबाद घरों के वासी, मैं आवारा और बदनाम
मेरे साथी, मेरे साथी, मेरे साथी खाली जाम
मेरे साथी खाली जाम

मजाज़ लखनवी की वह मोहब्बत
मजाज़ लखनवी को एक शादीशुदा महिला से इश्क़ हो गया था। उनके बारे में कहा जाता है कि ताइम्र उन्होंने उसे ही शिद्दत से चाहा और उसके लिए नज़्में कहीं। मजाज़ उनकी मुहब्बत में पागलखाने तक चले गए थे और ताउम्र शादी नहीं की। वह महिला भी मजाज़ की शायरी पर तो फ़िदा थी लेकिन वह कभी उनके लिए अपना घर ना छोड़ सकी। जब वह मजाज़ से मिलने तो आयी तो उन्होंने लिखा-

अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो
मैंने माना कि तुम इक पैकर-ए-रानाई हो
चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन-आराई हो
तलअत-ए-मेहर हो फ़िरदौस की बरनाई हो
बिंत-ए-महताब हो गर्दूं से उतर आई हो
मुझ से मिलने में अब अंदेशा-ए-रुस्वाई है
मैंने ख़ुद अपने किए की ये सज़ा पाई है

जावेद अख़्तर- शबाना आज़मी
जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी की प्रेम कहानी दिलचस्प है। जावेद शादीशुदा थे और पहली पत्नी से उनके संबंध में कुछ तल्ख़ियां आ गयीं थीं। इसी बीच शबाना को जावेद से मुहब्बत हो गयी। यह बात जब शबाना के पिता कैफ़ी को पता चली तो उन्होंने विरोध किया क्यूंकि उन्हें लगता था कि इससे जावेद की शादीशुदा ज़िंदगी ख़राब हो सकती है। लेकिन जावेद पहले ही तलाक़ का फ़ैसला ले चुके थे। इसके बाद शबाना और जावेद एक हो गए। जावेद ने शबाना के लिए लिखा-

ये आए दिन के हंगामे
ये जब देखो सफ़र करना
यहाँ जाना वहाँ जाना
इसे मिलना उसे मिलना
हमारे सारे लम्हे
ऐसे लगते हैं
कि जैसे ट्रेन के चलने से पहले
रेलवे-स्टेशन पर
जल्दी जल्दी अपने डब्बे ढूँडते
कोई मुसाफ़िर हों
जिन्हें कब साँस भी लेने की मोहलत है
कभी लगता है
तुम को मुझ से मुझ को तुम से मिलने का
ख़याल आए
कहाँ इतनी भी फ़ुर्सत है
मगर जब संग-दिल दुनिया मेरा दिल तोड़ती है तो
कोई उम्मीद चलते चलते
जब मुँह मोड़ती है तो
कभी कोई ख़ुशी का फूल
जब इस दिल में खिलता है
कभी जब मुझ को अपने ज़ेहन से
कोई ख़याल इनआम मिलता है
कभी जब इक तमन्ना पूरी होने से
ये दिल ख़ाली सा होता है
कभी जब दर्द आ के पलकों पे मोती पिरोता है
तो ये एहसास होता है
ख़ुशी हो ग़म हो हैरत हो
कोई जज़्बा हो
इस में जब कहीं इक मोड़ आए तो
वहाँ पल भर को
सारी दुनिया पीछे छूट जाती है
वहाँ पल भर को
इस कठ-पुतली जैसी ज़िंदगी की
डोरी टूट जाती है
मुझे उस मोड़ पर
बस इक तुम्हारी ही ज़रूरत है
मगर ये ज़िंदगी की ख़ूबसूरत इक हक़ीक़त है
कि मेरी राह में जब ऐसा कोई मोड़ आया है
तो हर उस मोड़ पर मैं ने
तुम्हें हम-राह पाया है

गुलज़ार-राखी
गीतकार गुलज़ार को अभिनेत्री राखी से प्रेम हुआ। दोनों की प्रेम कहानी आगे बढ़ी और दोनों की बेटी भी हुई जिसे गुलज़ार प्यार से बोस्की बुलाते हैं। लेकिन गुलज़ार और राखी आज अलग हो चुके हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि काम को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था, गुलज़ार नहीं चाहते थे कि राखी अभिनय के क्षेत्र में वापस जाएं। इसके बाद दोनों अलग हो गए, हालांकि उन्होंने आज तक तलाक नहीं लिया है। जिस दिन राखी गयीं थीं उस दिन के लिए गुलज़ार ने लिखा था-
शहर की बिजली गयी बंद कमरे में बहुत देर तक कुछ भी दिखाई नहीं दिया
तुम गयी थी जिस दिन उस रोज भी ऐसा ही हुआ था

शिव कुमार बटालवी
शिव पंजाब के एक बेहद मशहूर शायर हैं। कहते हैं कि शिव को एक लड़की से बेपनाह मुहब्बत हो गयी थी लेकिन वह ताउम्र उसे पा न सके। शिव ने अपनी तमाम कविताएं उसी के लिए लिखीं थीं। उन्हीं में से एक नज़्म है-

एक कु़ड़ी जेहदा नाम मुहब्बत ग़ुम है
गुम है, गुम है, गुम है..
इक्क कुड़ी जिदा नाम मोहब्बत
गुम है, गुम है, गुम है..

ओ साद मुरादी, सोहनी फब्बत
गुम है, गुम है, गुम है
गुम है, गुम है, गुम है

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