वर्ल्ड कप 2019: हार के बाद करोड़ों कंधे अपने सिर का बोझ नहीं उठा पा रहे है

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राकेश कुमार, नई दिल्ली, N.I.T. : किसी मुल्क की जनता ग़र एक साथ खुश है या एक साथ निराश है तो इसका मतलब है वो अपने पसंदीदा खेल को देख रही है। आज करोड़ो कंधे अपने सिर का बोझ नहीं उठा पा रहे है, पैरों में लग रहा है किसी ने ज़ंज़ीरे बाँध दी है। खेल ख़त्म हो चुका है और उम्मीद गर्म रेगिस्तान में तड़प कर मर चुकी है। हर एक खिलाड़ी जीतने के लिए ही मेहनत करता है और वह अपने मुल्क को विश्व विजेता बनाए इसका ख़्वाब देखता है। हर दिन जीत नसीब हो ऐसा भी नहीं पर ज़ख़्म कहां आसानी से भरते है, मेरे ज़ख़्म तो कतई नहीं।

ऐसा नहीं है कि कोई खिलाड़ी उम्मीद से कम खेला है और ऐसा भी नहीं है कि किसी की मेहनत में कमी थी पर ग़र आप बड़े खिलाड़ी है तो आपको बड़े मैच में बड़ा खेल खेलना होता है, बड़ी परफॉर्मेंस देनी होती है।

आप 50 शतक मार कर रिकॉर्ड बना सकते है पर एक बड़े मैच में बड़ा परफॉर्मेंस देना एक बड़े खिलाड़ी की निशानी होती है। रॉस टेलर अभी तक पूरे विश्व कप में फेल रहे पर सेमीफाइनल में अर्ध शतक लगा कर वह अपनी टीम को जीत दिलवा चुके है। साल 1996 में अरविन्द डिसिल्वा ने शतक लगा कर श्रीलंका को विश्व विजेता बनाया था लागातार तीन विश्व कप फाइनल में अर्धशतक और शतक मारकर एडम गिलक्रिस्ट ने अपनी टीम को तीनों बार विश्व विजेता बनाया था। ख़ुद गौतम गम्भीर और धोनी ने यादगार शतक मारकर 2011 में विश्व कप की ट्रॉफी दी।

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100 शतक मारने वाले सचिन तेंदुलकर 2003 और 2011 के विश्वकप में जल्दी लौटकर आ गए थे, लेकिन पोंटिंग ने 2003 के फाइनल में 140 रन मारकर बताया था कि वे क्यों महान है। लियोनल मेसी फुटबॉल के विश्वकप में एक जरुरी पेनल्टी चूक जाता है और उसी विश्वकप में क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैट्रिक लगाकर अपनी टीम को जीत दिलवाता है। बड़े मैच में बड़ा परफॉर्मेंस देना बड़े खिलाड़ी के सबसे गुण होते है, एक ही विश्वकप में पाँच शतक मारने वाले रोहित शर्मा और 41 वनडे सेंचुरी मारने वाले कोहली 2017 के चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भी फेल रहे और 2019 के सेमीफाइनल में भी।

महेंद्र सिंह धोनी हमेशा मेरे सबसे उम्दा प्लेयर्स थे, है और हमेशा रहेंगे। उन्होंने न केवल मुल्क को एक नई ऊँचाई दी बल्कि विश्व क्रिकेट को भी एक नया आसमान दिया। अपनी जवानी के दौर में हर बड़े मैच में उनका बड़ा परफॉर्मेंस दुनिया के लिए नज़ीर है, पर अबतक विश्व कप में एक दूसरे ही धोनी नज़र आए। मुझे लगा शायद उनका धीमा खेलना मैच की कंडीशन पर निर्भर कर रहा है।
पर एक गलती बार-बार हो इसका मतलब है कि आपके खेल में कुछ कमी है। खिलाड़ी बूढा हो सकता है, कमजोर हो सकता है पर उसके ” जीतने के इरादों” में कमी नहीं होनी चाहिए। धोनी का जीत का इंटेट इस विश्वकप से गायब रहा, सेमीफाइनल में भी मुझे ऐसा लग रहा था कि वे खेल तो रहे थे पर जडेजा के भरोसे।

शायद आप लोगों को ऐसा न दिखे या फिर आप देखना न चाहे।

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पर मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि मेरे चैंपियन प्लयेर में जीत का इंटेट नहीं था, उनकी विदाई ऐसी मुझे यकीन नहीं था। धोनी मैं आपको हमेशा मिस करूँगा लेकिन जीवन के उस क्षण में जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, आपके विनिंग इंटेन्ट की सबसे ज्यादा आवश्यकता थी, वो गायब रहा।

15 साल तक क्रिकेट को जीने वाले तुम आख़िरी खिलाड़ी हो लेकिन आई एम सॉरी धोनी, मेरा चैंपियन प्लेयर जीवन के सबसे अंतिम क्षण में बेहताश नज़र आया।

Rakesh Kumar (Research Scholar, Delhi University)

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