इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में गुरू नानक देव की 550 वा प्रकाशोत्सव मनाया गया, मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुई जामिया की प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र

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नई दिल्ली, N.I.T. : इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में सिख धर्म के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी के 550वे प्रकाश पर्व के अवसर पर पटेल भवन सभागार में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जामिया मिल्लिया इस्लामिया की हिन्दी विभाग ‘हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र’ थी।

गुरुनानक देव के जीवन और कृतित्व पर आधारित प्रोग्राम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति ‘प्रोफेसर एस के गक्खड’ ने की. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र जामिया मिल्लिया हिन्दी विभाग की हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट का स्वागत कुलपति ने शॉल ओढ़ाकर किया.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र ने गुरुनानक देव साहेब के जीवनी और उनके दिए गए सन्देश पर प्रकाश डाला. प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र ने भरे सभागार में कहा कि कौन है ये नानक? क्या केवल सिक्ख धर्म के संस्थापक. नहीं, मानव धर्म के उत्थापक. क्या वे केवल सिक्खों के आदिगुरू थे नहीं, वे मानव-मात्र के गुरु भी थे.

प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र ने आगे कहा कि

550 वर्षों तक उन्होंने जिन पावन उपदेशों का प्रकाश जन-जन को दिया, उससे आज भी पूरी मानवता आलोकित है.

नानक कोई दार्शनिक नहीं हैं. वे कोई शास्त्र नहीं रच रहे हैं. वे तो अपना अंतभार्व कह रहे हैं.जैसा उन्होंने अनुभव किया, वही कह रहे हैं. नानक की धारणा परम समपर्ण की है. वही भक्त की परम साधना है. नानक ने योग नहीं किया, तप नहीं किया, ध्यान नहीं किया. नानक ने सिर्फ गाया और गाकर ही पा लिया. उनका गीत ही ध्यान हो गया, गीत ही योग बन गया, गीत ही तप हो गया.

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