कार्डियक डेथ के मामलों में एचआईवी इंफेक्‍शन महत्‍वपूर्ण कारण

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नई दिल्ली, N.I.T. : एक स्‍टडी में यह बात सामने आई कि अचानक होने वाली कार्डियक डेथ के मामलों में एचआईवी इंफेक्‍शन से पीड़‍ित लोगों की संख्‍या ज्‍यादा है।इसमें यह बात सामने आई कि एचआईवी इंफेक्‍शन से पीड़‍ित लोगों को कार्डियक प्रॉब्‍लम ज्‍यादा होती है। साथ ही अचानक होने वाली कार्डियक मौतों में भी इनकी संख्‍या ज्‍यादा है। यह रिसर्च जनरल ‘सर्कुलेशन’ में प्रकाशित हुई है। इसमें एचआईवी इफेक्‍टेड और अनइफेक्‍टेड पुरुषों के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इसमें यह पाया गया है कि वायरस के साथ रहने वाले पुरुषों में क्यूटी अंतराल (हृदय की गति मापक मात्रा जो कि हार्ट की इलेक्‍ट्रकिल प्रॉपर्टीज के बारे में बताता है ) की परिवर्तनशीलता अधिक है, जो कि अचानक हृदय संबंधी मौतों के जोखिम को बढ़ाता है। स्‍टडी के लीड ऑथर अमीर हेरवी जो कि जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के मेडिकल स्‍टूडेंट हैं, वह कहते हैं कि इस वक्‍त यह जरूरी है कि मरीजों और प्रदाताओं के जरिए यह संदेश दिया जाए कि एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के साथ एचआईवी संक्रमण का जल्द से जल्द इलाज करवाया जाना चाहिए ताकि इस पर नियंत्रण किया जा सके। ख्‍याल रखें कि पेशेंट पूरी तरह से चिकित्‍सीय परीक्षण और दवाओं के साथ जुड़े रहें ताकि इस पर नियंत्रण किया जा सके और वायरस के स्‍तर का भी पता लगाया जा सके। इसके अलावा एचआईवी इफेक्‍टेड लोगों को अपनी हेल्‍थ को लेकर थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होती है। उन्‍हें कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के फैक्‍टर को दूर करने के सारे प्रयास करने चाहिए। हेल्‍दी डाइट के साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि स्‍मोकिंग से दूर रहें। साथ ही डायबिटीज है तो उसका प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना चाहिए। ताकि हार्ट पर एक्‍स्‍ट्रा प्रेशर न पड़े।
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हेरवी के मुताबिक साल 2012 में सैन फ्रांसिस्‍को खाड़ी क्षेत्र में पहली बार एक एचआईवी क्लिनिक में एचआईवी इंफेक्‍टेड लोगों में अचानक हृदय की मृत्यु में वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि इसमें होने वाले वृद्धि में बायलॉजिकल रीजन्‍स का पता नहीं चल सका। इस विषय पर और अधिक जानने के लिए किए गये प्रयासों में जॉन्स हॉपकिन्स के शोधकर्ताओं ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मल्टिसेन्ट एड्स कोहोर्ट स्टडी (एमएसीएस) से एकत्र किए गए डेटा का इस्तेमाल किया। जो कि 30 वर्षों से चल रहे अध्ययन पर आधारित है। जिसमें चार अमेरिकी शहरों के समलैंगिक और उभयलिंगी पुरुषों के स्वास्थ्य को फॉलो किया गया। प्राप्‍त किए गये आंकड़ों में एचआईवी संक्रमण के बिना 534 पुरुषों और संक्रमित 589 पुरुषों से प्राप्‍त परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें से 83 प्रतिशत के पास एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के परिणामस्वरूप उनके रक्त में वायरस के अवांछनीय स्तर थे। कुछ 61 प्रतिशत पुरुषों ने श्वेत के रूप में पहचान की, 25 प्रतिशत ने अफ्रीकी अमेरिकी और 14 प्रतिशत ने हिस्पैनिक या ‘अन्य।’ बता दें कि सभी प्रतिभागियों की औसत आयु 57 वर्ष थी, और एचआईवी वाले लोग लगभग 13 वर्षों से इस बीमारी का इलाज कर रहे थे। बता दें कि प्रत्येक प्रतिभागी ने दिल की लय को लगातार मापने के लिए एक पोर्टेबल इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) ‘पैच’ डिवाइस पहना। इसके बाद शोधकर्ताओं ने धड़कनों के बीच अंतराल पर 3-4 दिनों के डेटा का विश्लेषण किया जब दिल के ताल को चलाने वाले विद्युत सिग्नल फायरिंग नहीं होते हैं। यह विद्युत विश्राम चरण, जिसके दौरान दिल एक नई धड़कन के लिए एक और पल्स भेजने की तैयारी कर रहा है जिसे क्यूटी अंतराल के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति में प्रत्येक दिल की धड़कन के बीच क्यूटी अंतराल जो कि तय होता है कि कितना होगा? इसे नोटिस किया गया। बताया जाता है कि यदि क्‍यूटी अंतराल अधिक या फिर असमान्‍य हो तो यह फेटल हार्ट रिदम कहलाता है।
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शोधकर्ताओं ने रिसर्च में पाया कि एचआईवी के बिना पुरुषों की तुलना में एचआईवी वाले पुरुषों में क्यूटी अंतराल अधिक होता है, जो उनके हृदय गति परिवर्तनशीलता के लिए उम्मीद की जाएगी से 0.077 अधिक है। इसके अलावा उन्होंने पाया कि यह परिवर्तनशीलता प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए वायरस के स्‍तर से जुड़ा हुआ था। जैसा कि एक रक्त परीक्षण से मापा गया था। एचआईवी के साथ रहने वाले पुरुषों, लेकिन undetectable एचआईवी वायरस के साथ एचआईवी के बिना पुरुषों की तुलना में सिर्फ0.064 की औसत क्यूटी अंतराल परिवर्तनशीलता थी जबकि वायरस के उच्च स्तर वाले पुरुषों में औसतन 0.150 से अधिक क्यूटी अंतराल परिवर्तनशीलता थी। हालांकि किसी भी प्रतिभागी ने शार्ट टाइम स्‍टडी के दौरान अचानक हृदय की मृत्यु का अनुभव नहीं किया।

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